नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए देशवासियों को भारतीय संस्कृति के गूढ़ दर्शन, पर्यावरण संरक्षण और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक खास संदेश दिया है।
संस्कृत श्लोकों (सुभाषित) और उनके मर्मस्पर्शी हिंदी अर्थों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सेवाभाव और कृतज्ञता व्यक्त करने की बात कही। उन्होंने लिखा, "प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।"
इससे पहले बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पीएम मोदी ने गुरु-शिष्य परंपरा को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुसंस्कारित भी करते हैं।
इससे पूर्व बीते दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा गया था, "प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।" उन्होंने संस्कृत श्लोक, "लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः ॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः ॥" भी साझा किया था।
जिसका हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।
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