पेपर लीक पर आजीवन कारावास तक का हो प्रावधान, 'वंदे मातरम' पर नहीं होना चाहिए विवाद: आनंद दुबे

पेपर लीक पर आजीवन कारावास तक का हो प्रावधान, 'वंदे मातरम' पर नहीं होना चाहिए विवाद: आनंद दुबे

मुंबई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने पेपर लीक, 'हर घर तिरंगा' अभियान और 'वंदे मातरम' बिल समेत कई अहम मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर विधेयक पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, जबकि पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ अत्यंत कठोर कानून बनाया जाना चाहिए ताकि देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

आईएएनएस से खास बातचीत में आनंद दुबे ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। हर विषय पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। जब भी कोई विधेयक सदन में आता है तो उसका ड्राफ्ट सदस्यों के सामने रखा जाता है, जिसके बाद उसके लाभ, हानि और प्रभावों पर चर्चा होती है। विपक्ष हमेशा रचनात्मक चर्चा के लिए तैयार रहता है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी दलों को विश्वास में लेकर सदन चलाए। 'वंदे मातरम' के विरोध का कोई सोच भी नहीं सकता, क्योंकि यह देश की मातृभूमि के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। यदि हम अपनी मातृभूमि की वंदना नहीं करेंगे तो फिर किसकी करेंगे। 'वंदे मातरम' विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी सदन में खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि विपक्ष को विश्वास में लेकर व्यापक चर्चा कराई जाए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक मजबूत हो।

'हर घर तिरंगा' अभियान पर आनंद दुबे ने कहा कि हर घर पर तिरंगा लहराना चाहिए और हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों ने जो विरासत देश को सौंपी है, उसे आगे बढ़ाना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, गृह मंत्री अमित शाह या राज्यों के मुख्यमंत्री, सभी संवैधानिक पदों पर बैठकर भारत की सेवा करते हैं और सभी के मन में पहले भारत, फिर दुनियादारी की भावना होनी चाहिए। यदि प्रधानमंत्री मोदी 'मन की बात' के माध्यम से देशवासियों से संवाद कर रहे हैं तो लोगों को भी उस संदेश को सुनना चाहिए।

महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश में सभी वर्गों के लोग रहते हैं, जिनमें महिलाएं, युवा, जेन-जी, अल्फा और मिलेनियल्स शामिल हैं। केवल किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की समस्याओं पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। सरकार कई मामलों में समय रहते निर्णय नहीं ले सकी, जिसके कारण लोगों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यदि सरकार पहले ही सक्रिय हो जाती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। आने वाले समय में सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, रेलवे, हवाई अड्डों और आम जनता से सीधे जुड़े सभी क्षेत्रों में सुधार पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए। जनता बेहतर सुविधाएं चाहती है और सरकार को उसी दिशा में काम करना चाहिए।

महिलाओं के अधिकारों पर उन्होंने कहा कि लड़के और लड़कियों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। बेटियां देश की अमूल्य धरोहर हैं और उन्हें समान अवसर एवं समान अधिकार मिलना चाहिए। समाज और सरकार दोनों को समानता की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा और हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाना होगा।

पेपर लीक के मुद्दे पर आनंद दुबे ने कहा कि यह देश के लिए दीमक की तरह है, जो धीरे-धीरे व्यवस्था को खोखला कर सकता है। परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ ऐसा सख्त कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके। सरकार ने प्रस्तावित कानून में 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए के जुर्माने की बात कही है, लेकिन इस पर और व्यापक चर्चा होनी चाहिए। सजा और अधिक कठोर होनी चाहिए ताकि यह दूसरों के लिए भी नजीर बने। वर्ष 2015, 2016, 2021, 2024 और 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं और हालिया मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है।

आनंद दुबे ने आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों में आजीवन कारावास जैसे प्रावधानों पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही, आर्थिक दंड भी इतना कठोर होना चाहिए कि अपराध करने वाले भविष्य में दोबारा ऐसा करने की कल्पना भी न कर सकें। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए पेपर लीक के खिलाफ मजबूत और प्रभावी कानून समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

--आईएएनएस

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