पुणे में लिंग जांच रैकेट का पर्दाफाश, पुलिस कस्टडी में चिकित्सक समेत दो आरोपी

पुणे में लिंग जांच रैकेट का पर्दाफाश, पुलिस कस्टडी में चिकित्सक समेत दो आरोपी

पुणे, 27 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड के यवत थाना क्षेत्र इलाके से सामने आए अवैध गर्भलिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या रैकेट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गहन जांच के बाद ठोस सबूत जुटाकर यह कार्रवाई की।

गिरफ्तार आरोपियों में डॉ सुमंत तुकाराम शितोळे (उम्र 38 वर्ष, निवासी पारगांव, दौंड) और बापूराव पंढरीनाथ जांबले (उम्र 57 वर्ष, निवासी वासुंदे, दौंड) शामिल हैं। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद शनिवार को पुलिस द्वारा उन्हें दौंड न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 1 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है।

जांच में सामने आया है कि डॉ शितोळे मुख्य आरोपी के माध्यम से अवैध लिंग जांच करवाकर गर्भवती महिलाओं को अपने अस्पताल में लाकर उनका गैरकानूनी गर्भपात करा रहा था। वहीं, बापूराव जांबले इस रैकेट में एजेंट के रूप में काम कर रहा था और गर्भपात के लिए आवश्यक प्रतिबंधित दवाइयों और इंजेक्शन की आपूर्ति करता था।

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल्ल, अपर पुलिस अधीक्षक गणेश बिराजदार, पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र मायने और बापूसाहेब दडस के मार्गदर्शन में की गई। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक संतोष तासगावकर के नेतृत्व में एसआईटी टीम द्वारा की जा रही है।

बता दें कि मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच करना या करवाना, जिसे 'लिंग परीक्षण' कहा जाता है, देश में एक कानूनी अपराध है। इसे रोकने के लिए सरकार ने पीसी-पीएनडीटी (गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व नैदानिक ​​तकनीकें) एक्ट लागू किया, जिसका उल्लंघन करने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। भारत में पीसी-पीएनडीटी अधिनियम 1 जनवरी 1996 को पूर्ण रूप से लागू हुआ था। इसे मुख्य रूप में देश में हो रहे कन्या भ्रूण हत्या को रोखने और गिरते लिंगानुपात में सुधार करने के मकसद से लागू किया गया था।

--आईएएनएस

डीके/एबीएम