'पुलिस का राजनीतिकरण कोई नई बात नहीं', अमृतसर सीपी के तबादले पर पूर्व डीजीपी शशिकांत

'पुलिस का राजनीतिकरण कोई नई बात नहीं', अमृतसर सीपी के तबादले पर पूर्व डीजीपी शशिकांत

चंडीगढ़, 7 अगस्त (आईएएनएस)। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह के तबादले पर पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शशिकांत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस प्रशासन में तबादलों की प्रक्रिया और पुलिस के राजनीतिकरण की बात कही। साथ ही, संसद भवन में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात पर भी के बाद संभावित भाजपा-अकाली दल गठबंधन पर अपनी राय रखी।

अमृतसर पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह के तबादले पर शशिकांत ने कहा कि किसी एक घटना को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सरकारी नौकरी में स्थानांतरण और प्रशासनिक निर्णय कार्यप्रणाली का हिस्सा होते हैं। गुरप्रीत सिंह ने जिस मामले की जानकारी जुटाई होगी, वह अपने खुफिया सूत्रों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर ही जुटाई होगी और उन्हें उनके काम पर भरोसा है। हर नौकरी में अपनी-अपनी चुनौतियां होती हैं। पुलिस सेवा हो, आईएएस हो या आयकर विभाग, किसी भी सरकारी सेवा में काम करना हमेशा आसान नहीं होता। गुरप्रीत सिंह की कार्यशैली की सराहना करते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि वे उनके साथ काम कर चुके अधिकारियों में सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों में से एक हैं। पुराने अधिकारियों में गुरप्रीत सिंह बेहद सक्षम और बेहतरीन अधिकारी रहे हैं।

पुलिस के बढ़ते राजनीतिकरण के सवाल पर शशिकांत ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब वे सेवा में थे तब भी ऐसी स्थिति थी और आज भी लगभग हर राज्य में यही स्थिति देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि पुलिस एक स्वतंत्र एजेंसी नहीं है; यह सरकार के अधीन काम करती है। इसलिए सरकार की नीतियों और राजनीतिक व्यवस्था का प्रभाव पुलिस तंत्र पर स्वाभाविक रूप से पड़ता है। यदि कोई अधिकारी सरकार की कार्यप्रणाली के अनुरूप नहीं चलता तो उसका तबादला कर दिया जाता है। इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करना आसान नहीं है क्योंकि प्रशासनिक ढांचा इसी प्रकार संचालित होता है।

संसद भवन में प्रधानमंत्री मोदी और शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि राजनीति में संवाद और गठबंधन की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल पहले भी लंबे समय तक गठबंधन में सरकार चला चुके हैं। अकाली दल के नेताओं के बयान भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं, जिनमें दोनों दलों के फिर से साथ आने की संभावना जताई गई है।

पूर्व डीजीपी ने कहा कि अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीति मजबूत करने में लगे हुए हैं। प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात में स्वाभाविक रूप से राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई होगी। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल को चुनाव से पहले या बाद में किसी अन्य दल के साथ गठबंधन करने का पूरा अधिकार है।

पंजाब की कानून-व्यवस्था को लेकर शशिकांत ने कहा कि केवल पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के लगभग सभी राज्यों में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी गैंगस्टर और राजनीतिक अपराध जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। पुलिस की नौकरी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है और समय-समय पर नई परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। समाज विरोधी और राष्ट्र विरोधी तत्व हमेशा सक्रिय रहते हैं और किसी भी सरकार के लिए उन्हें पूरी तरह समाप्त कर पाना आसान नहीं होता। पूर्व की बादल सरकार के दौरान बेअदबी के मामले बड़े मुद्दे बने थे, जबकि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी हिंसा और अन्य गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। इसलिए कानून-व्यवस्था की चुनौती किसी एक सरकार तक सीमित नहीं है।

पूर्व डीजीपी ने आगे कहा कि पुलिस और अपराधियों के बीच हमेशा एक तरह की प्रतिस्पर्धा चलती रहती है। कभी पुलिस बढ़त बना लेती है तो कभी अपराधी एक कदम आगे निकल जाते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपराध को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है।

--आईएएनएस

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