चेन्नई, 7 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने वार्षिक पोंगल उपहार योजना के तहत वितरित की जाने वाली मुफ्त धोती और साड़ियों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। वर्ष 2027 के लिए इन साड़ियों और धोतियों को बेहतर गुणवत्ता, अधिक टिकाऊ कपड़े और नए रंगों के साथ तैयार किया जाएगा।
पिछले एक दशक से भी अधिक समय बाद इस योजना में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे लाभार्थियों के साथ-साथ राज्य के हथकरघा उद्योग को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत मुफ्त साड़ियों में अब पहले की तुलना में अधिक कपास (कॉटन) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे वे खासकर गर्मियों में पहनने के लिए अधिक आरामदायक होंगी। अधिकारियों के अनुसार, नई साड़ियां अब 60 पॉली-कॉटन धागे से बुनी जाएंगी, जिसमें 80:20 पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात होगा। पहले यह अनुपात 90:10 था।
नई साड़ियों में सिल्वर या कॉपर रंग की पॉलिएस्टर बॉर्डर भी होगी। इसके अलावा अब इन्हें पहले से उपलब्ध हल्के नीले, गुलाबी और आइवरी सफेद रंग के साथ हरे रंग में भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने मुफ्त धोतियों की गुणवत्ता में भी सुधार किया है। अब इन्हें 40 ग्रे पॉली-कॉटन धागे से बुना जाएगा, जिसमें 65:35 पॉलिएस्टर-कॉटन अनुपात होगा। पहले यह अनुपात 80:20 था। प्रत्येक धोती की लंबाई 2 मीटर और चौड़ाई 50 इंच होगी। इसमें रंगीन पॉलिएस्टर बॉर्डर होगी और पहली बार धोतियों को धोकर (वॉशिंग के बाद) वितरित किया जाएगा। वहीं, साड़ियों का आकार पहले की तरह 5.5 मीटर लंबाई और 45 इंच चौड़ाई का रहेगा।
1 जुलाई को हथकरघा एवं खादी विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, इन नए डिजाइन वाले कपड़ों का उत्पादन हथकरघा और पावरलूम बुनकर सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि नई गुणवत्ता और डिजाइन से कपड़ों की आकर्षकता बढ़ेगी, सहकारी स्पिनिंग मिलों में धागे का उत्पादन बढ़ेगा और निर्माण प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित होगी। सरकार ने पोंगल 2027 के लिए 1.7764 करोड़ साड़ियों और 1.7722 करोड़ धोतियों के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य पिछले तीन वर्षों की तरह ही रखा गया है।
हालांकि, जिला कलेक्टरों ने अनुमानित मांग के आधार पर 2.27 करोड़ से अधिक साड़ियों और 2.25 करोड़ से अधिक धोतियों की मांग की थी, लेकिन नए डिजाइन लागू करने के लिए सीमित समय को देखते हुए सरकार ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं किया।
सरकारी संस्था को-ऑपटेक्स और तमिलनाडु टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन सहकारी बुनकर समितियों से इन कपड़ों की खरीद करेंगे और फिर इन्हें तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाया जाएगा।
समय पर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अल्पकालिक निविदाओं (शॉर्ट-टर्म टेंडर) के जरिए धागे की खरीद की भी अनुमति दी है। पोंगल 2027 योजना की कुल लागत 642.88 करोड़ रुपए आंकी गई है। वहीं, 2026-27 के राज्य बजट में इस योजना के लिए 606.94 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जिसमें से सरकार उत्पादन शुरू करने के लिए 300 करोड़ रुपए की पहली किस्त पहले ही जारी कर चुकी है।
सरकार ने यह भी तय किया है कि पोंगल 2026 योजना का बचा हुआ स्टॉक इस वर्ष दीपावली पर वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले लाभार्थियों को वितरित किया जाएगा। इसके बाद भी यदि कुछ स्टॉक बचता है तो उसका उपयोग अन्य सरकारी कार्यों में किया जाएगा।
इस पहल का स्वागत करते हुए सेलम के हथकरघा बुनकरों ने कहा कि नए डिजाइन और बेहतर गुणवत्ता से इन कपड़ों की मांग और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे। साथ ही, समय पर धन जारी होने से बुनकरों को समय पर भुगतान मिलेगा, जिससे उत्पादकों और पोंगल उपहार पाने वाले लोगों का लाभ होगा।
--आईएएनएस
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