भुवनेश्वर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। गवर्नर हरि बाबू कम्भमपति ने शुक्रवार को ओडिशा के लोगों से अपील की कि वे हैंडलूम को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं और राज्य भर के हजारों बुनकर परिवारों की मदद के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार हैंडलूम के बने कपड़े पहनें।
गवर्नर ने आईडीसीओ प्रदर्शनी ग्राउंड में 12वें राज्य-स्तरीय राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकारी अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों, शिक्षकों, पेशेवरों और युवा नागरिकों से ओडिशा के हैंडलूम उत्पादों को चुनकर मिसाल कायम करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "इस तरह का एक छोटा सा व्यक्तिगत संकल्प राज्य भर के हमारे हजारों बुनकर परिवारों की मदद के लिए एक शक्तिशाली आंदोलन बन सकता है।"
कम्भमपति ने कहा कि हाथ से बुने हर कपड़े में कौशल, लगन, पारिवारिक परंपरा और मानवीय रचनात्मकता की कहानी छिपी होती है। मशीन से बने उत्पादों के विपरीत, हैंडलूम से बनी हर चीज में कारीगरों का समर्पण और व्यक्तिगत स्पर्श झलकता है।
उन्होंने आगे कहा कि जब लोग हैंडलूम का कोई उत्पाद खरीदते हैं, तो वे सिर्फ कपड़ा नहीं खरीद रहे होते, बल्कि एक परिवार की मदद कर रहे होते हैं, ग्रामीण रोजगार को बनाए रख रहे होते हैं, महिलाओं को सशक्त बना रहे होते हैं, पारंपरिक ज्ञान को बचा रहे होते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे होते हैं।
गवर्नर ने कहा कि राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस सिर्फ एक उद्योग का जश्न नहीं है, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और उन कुशल हाथों को सम्मान देने का दिन है, जिन्होंने सदियों से देश की बुनाई की विरासत को संजोकर रखा है। हर साल 7 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिन 1905 के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है, जब हाथ से बुने कपड़े आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बन गए थे।
ओडिशा की समृद्ध हैंडलूम विरासत के बारे में बात करते हुए, गवर्नर ने कहा कि राज्य की बुनाई परंपरा की जड़ें कलिंग की प्राचीन समुद्री विरासत में हैं और यह इसकी सांस्कृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा है। ओडिशा के मशहूर हैंडलूम उत्पादों ने अपने अनोखे डिजाइन और कारीगरी के लिए दुनिया भर में पहचान बनाई है। इनमें संबलपुरी बंधा, ओडिशा इकत, बोमकाई, खंडुआ, कोटपाड, हबासपुरी, बेरहामपुर पट्टा और गोपालपुर टसर शामिल हैं।
इस साल की थीम 'हर किसी की जिंदगी में हथकरघा का एक हिस्सा' का जिक्र करते हुए, कम्भमपति ने कहा कि हथकरघा को सिर्फ खास मौकों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे कपड़ों, घर की सजावट के सामान और दूसरे उत्पादों के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने डिजाइन में इनोवेशन, डिजिटल मार्केटिंग, टूरिज्म से जुड़ाव, संस्थागत मदद और टेक्नोलॉजी-आधारित प्रोडक्ट ट्रेसिबिलिटी के जरिए इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए की गई कोशिशों की तारीफ की।
गवर्नर ने स्टेट हैंडलूम अवॉर्ड पाने वालों को बधाई देते हुए कहा कि बुनकर एक अनमोल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि ओडिशा का हथकरघा सेक्टर ग्लोबल मंच पर राज्य की पहचान, क्रिएटिविटी और उत्कृष्टता को दिखाता रहेगा।
इस कार्यक्रम के दौरान 'कुसुम – खोए हुए फैब्रिक का पुनरुद्धार' और 'करुणा सिल्क' पर वीडियो दिखाए गए। जगतसिंहपुर में कास्ता हैंडलूम भवन, और जाजपुर के सुकिंदा में ओएमबीएडीसी के तहत तसर सिल्क पार्क फेज-I और तसर फैसिलिटी सेंटर की आधारशिला रखी गई। साथ ही, खोर्धा के राउतपाड़ा में फैब्रिक कैलेंडरिंग यूनिट का वर्चुअल उद्घाटन किया गया।
--आईएएनएस
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