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'शिक्षा का राजनीतिकरण ठीक नहीं', एनसीईआरटी विवाद पर पूर्व अधिकारी वेद प्रकाश

शिक्षा का राजनीतिकरण ठीक नहीं

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। कक्षा 11वीं और 12वीं की पॉलिटिकल साइंस की एनसीईआरटी टेक्स्ट बुक टीम के पुनर्गठन को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच एनसीईआरटी के पूर्व अधिकारी वेद प्रकाश ने शिक्षा के कथित राजनीतिकरण पर अपनी राय रखी है। टीम के कुछ सदस्यों के आरएसएस और एबीवीपी से कथित जुड़ाव को लेकर उठ रहे सवालों पर वेद प्रकाश ने कहा कि किसी विशेषज्ञ की पहचान उसके राजनीतिक या वैचारिक जुड़ाव से नहीं, बल्कि संबंधित विषय में उसके शोध, अनुभव और योगदान से होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन सीधे तौर पर नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। ऐसे में केवल किसी सदस्य के किसी संगठन से जुड़े होने के आधार पर पूरी समिति या उसके तैयार किए जाने वाले कंटेंट पर सवाल उठाना उचित नहीं है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा 3 से 12वीं तक की किताबों के क्रियान्वयन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। इसके परामर्श के बाद एनसीईआरटी का संबंधित विभाग, जैसे सोशल साइंस विभाग, विशेषज्ञों से सलाह लेकर समूह तैयार करता है।

उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों का चयन करते समय यह प्राथमिक आधार नहीं होता कि कोई व्यक्ति किस संगठन या विचारधारा से जुड़ा है। इसके बजाय यह देखा जाता है कि संबंधित क्षेत्र में उसका शोध कितना महत्वपूर्ण है, उसकी विशेषज्ञता क्या है और उस विषय में उसका योगदान कितना है। पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया में कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षकों और शिक्षक-शिक्षकों को भी शामिल किया जाता है। इसलिए किसी एक समूह के सदस्यों की वैचारिक पृष्ठभूमि के आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

आरएसएस और एबीवीपी से कथित जुड़ाव को लेकर उठ रहे सवालों पर वेद प्रकाश ने कहा कि इस तरह के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। उन्होंने 2000 में तैयार किए गए एनसीएफ और उसके बाद पाठ्यपुस्तकों को लेकर हुए विवाद का उदाहरण दिया। उस समय पाठ्यक्रम और किताबों को लेकर 'सैफ्रनाइजेशन' के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद 2005 में यूपीए सरकार के समय बदलाव किए गए तो उन पर 'लेफ्टिज्म' के आरोप लगे। जब कोई व्यक्ति अकादमिक और बौद्धिक क्षेत्र में काम करता है तो उसका किसी न किसी विचारधारा या समूह से वैचारिक या सामाजिक जुड़ाव हो सकता है। कोई व्यक्ति लेफ्ट से जुड़ा हो सकता है तो कोई राइट विंग से। इसलिए केवल इस आधार पर किसी विशेषज्ञ की योग्यता पर सवाल उठाना सही नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विशेषज्ञ का मूल्यांकन उसके क्षेत्र में किए गए काम और योगदान के आधार पर होना चाहिए।

वेद प्रकाश ने कहा कि असली सवाल यह होना चाहिए कि नई समिति जो कंटेंट तैयार करती है, उसकी गुणवत्ता कैसी है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ समिति द्वारा कंटेंट तैयार करने के बाद भी उसे सीधे अंतिम रूप नहीं दिया जाता। समिति द्वारा तैयार सामग्री आगे एक कोर ग्रुप के पास जाती है। वहां उसका आंतरिक परीक्षण और समीक्षा की जाती है। इसके बाद यह अंतिम स्तर की समिति के पास जाती है। अंतिम मंजूरी से पहले संबंधित निगरानी समिति द्वारा कंटेंट की समीक्षा और स्वीकृति की प्रक्रिया होती है। उसके बाद ही किताब को प्रिंटिंग के लिए भेजा जाता है।

वेद प्रकाश ने इसी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति की वैचारिक पृष्ठभूमि के कारण पाठ्यपुस्तक के कंटेंट पर प्रभाव पड़ जाना आसान नहीं है। सामग्री को कई स्तरों पर जांचे और परखे जाने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाता है। एनसीईआरटी और सीबीएसई के सिलेबस में बदलाव को लेकर लगातार होने वाले राजनीतिक विवाद पर वेद प्रकाश ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को राजनीति से अलग रखना चाहिए। शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जिसे सभी राजनीतिक दल मिलकर तैयार करें और लंबे समय तक स्थिरता के साथ लागू किया जा सके। जरूरत के मुताबिक समय-समय पर इसमें बदलाव और अपडेट जरूर किए जाने चाहिए।

उन्होंने 1986 की शिक्षा नीति के बाद वर्ष 2020 में नई शिक्षा नीति आने का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे अंतराल में देश और दुनिया का वातावरण काफी बदल चुका था। इसी बदले हुए परिवेश को ध्यान में रखते हुए नई शिक्षा नीति तैयार की गई। इसलिए शिक्षा नीति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय उसके उद्देश्यों और बच्चों पर उसके प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए।

नई एनसीईआरटी किताबों को लेकर वेद प्रकाश ने कहा कि उन्होंने अब तक कई किताबें पढ़ी और देखी हैं तथा उन्हें लगता है कि मौजूदा दौर में तैयार की जा रही किताबें काफी बेहतर हैं। नई किताबों का उद्देश्य बच्चों को केवल रटने के लिए मजबूर करना नहीं है। इसके बजाय किताबों की सामग्री इस तरह तैयार की जा रही है कि बच्चे उसे सामान्य रूप से पढ़ें और विषय को समझ सकें। किताबों में बच्चों के मन में उठने वाले संभावित सवालों को भी जगह दी गई है। विशेष रूप से कक्षा 9वीं और 10वीं की किताबों का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि उनमें विद्यार्थियों को विषय को समझने और उस पर सवाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। मौजूदा पाठ्यक्रम को अब तक के बेहतर करिकुलम में से एक बताते हुए, उन्होंने कहा कि उनके आकलन के अनुसार नई शिक्षा नीति और इसके तहत तैयार हो रही वेद प्रकाश की किताबें काफी अच्छी हैं।

टेक्स्ट बुक टीम के सदस्यों को आरएसएस या एबीवीपी से जोड़ने के सवाल पर वेद प्रकाश ने कहा कि इस तरह का राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अकादमिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का किसी न किसी विचारधारा से जुड़ाव हो सकता है। कोई आरएसएस या एबीवीपी से जुड़ा हो सकता है, कोई कांग्रेस या लेफ्ट विचारधारा से जुड़ा हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञ का चयन करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात उसका शैक्षणिक और विषयगत योगदान होना चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति ने शिक्षा, भाषा या उस विषय के क्षेत्र में क्या योगदान दिया है, न कि केवल यह कि उसकी राजनीतिक या वैचारिक संबद्धता किसके साथ है।

--आईएएनएस

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