नीट पेपर लीक: राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की आलोचना की, शिक्षा प्रणाली और कोचिंग क्लास संस्कृति पर सवाल उठाए

नीट पेपर लीक: राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की आलोचना की, शिक्षा प्रणाली और कोचिंग क्लास संस्कृति पर सवाल उठाए

नासिक, 7 अगस्त (आईएएनएस)। नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने पर देशव्यापी आक्रोश और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 40 दिनों तक चले छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नासिक में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार, कोचिंग संस्थानों और शिक्षा प्रणाली की आलोचना की।

मीडिया को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ विरोध प्रदर्शन एक व्यापक जन आक्रोश की महज शुरुआत थी।

उन्होंने आगे कहा, “इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन कई वर्षों बाद हो रहा है। हर माता-पिता के बच्चे ने नीट परीक्षा नहीं दी। लेकिन, दिल्ली के युवाओं द्वारा प्रदर्शित आक्रोश व्यापक सामाजिक असंतोष को दर्शाता है। मेरा मानना ​​है कि आने वाले दिनों में यह आक्रोश और भी तीव्र होगा।”

केंद्रीय सरकार द्वारा प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की आलोचना करते हुए ठाकरे ने कहा, "जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा था। लेकिन, केंद्रीय सरकार ने स्थिति को भड़काया। जब दिल्ली में पुलिस ने प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ बल प्रयोग किया, तो आंदोलन हर घर तक पहुंच गया। माता-पिता और बुजुर्गों को ऐसा लगा जैसे उनके अपने बच्चों को पीटा जा रहा हो। मेरा मानना ​​है कि यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के भीतर के आंतरिक संघर्षों से उपजा है, जो अब खुलकर सामने आ रहे हैं।"

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल पर निशाना साधते हुए एमएनएस प्रमुख ने टिप्पणी की कि नेताओं को प्रशासनिक तुच्छताओं के बजाय राज्य में छात्रों की दुर्दशा पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने निजी कोचिंग केंद्रों की हावी संस्कृति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि कैसे छात्र कक्षा 10 के बाद तुरंत कक्षाओं में दाखिला ले लेते हैं और ये संस्थान प्रभावी रूप से कॉलेज प्रवेश का निर्णय करते हैं।

उन्होंने पूछा, “छात्र कॉलेज जाने के बजाय दिन में आठ घंटे कोचिंग कक्षाओं में बैठे रहते हैं। ऐसे में कॉलेजों की क्या भूमिका है? जब छात्र अपना पूरा दिन कोचिंग केंद्रों में बिताते हैं, तो कॉलेजों में उपस्थिति कैसे दर्ज की जाती है?”

यह स्पष्ट करते हुए कि सभी कोचिंग संस्थान खराब नहीं हैं। ठाकरे ने इस क्षेत्र को एक व्यवसायीकृत उद्यम बताया और आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की शुरुआत इन्हीं कोचिंग संस्थानों के माध्यम से हुई थी।

उन्होंने अधिकारियों और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप करने और ऐसे संस्थानों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया।

ठाकरे ने परीक्षा लीक से जुड़े छात्र आत्महत्याओं के मुद्दे को भी उजागर किया।

उन्होंने बताया कि जहां देशभर में 21 छात्रों ने दुखद रूप से अपनी जान ले ली, वहीं नासिक निवासी यश गोसावी, जिन्होंने नीट परीक्षा के पेपर लीक होने से उपजे अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली - का नाम सरकार की पीड़ितों की आधिकारिक सूची से हटा दिया गया था।

उन्होंने पूछा, “आज के युवाओं के पास स्मार्टफोन हैं और वे वैश्विक रुझानों पर नजर रखते हैं, जिसके चलते कई लोग विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक हैं। भारतीय माता-पिता विदेशी शिक्षा पर सालाना लगभग 5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यहां तक ​​कि धर्मेंद्र प्रधान की बेटी ने भी विदेश में पढ़ाई की है। अगर पूर्व शिक्षा मंत्री के अपने परिवार को ही देश की शिक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है, तो आम माता-पिता को क्यों होना चाहिए?”

--आईएएनएस

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