पटना, 20 जून (आईएएनएस)। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि 21 जून को होने वाली नीट यूजी परीक्षा से पहले मॉक ड्रिल, बंगाल में विपक्ष के दावों, भारत गठबंधन की आलोचना और अन्य राष्ट्रीय कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिप्पणी की।
नीट की दोबारा परीक्षा पर जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने आईएएनएस से कहा, "परीक्षाओं को लेकर सरकार ने पारदर्शी और सुचारू रूप से परीक्षा आयोजित करने की तैयारी की है। पेपर और प्रश्न पत्र लीक को लेकर छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए सभी कदम उठाए गए हैं। परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपायों के तौर पर टेलीग्राम पर प्रतिबंध और वायुसेना के विमानों से अलग-अलग राज्यों में प्रश्नपत्रों को पहुंचाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।"
टेलीग्राम पर स्थायी बैन जारी रहने को लेकर राजीव रंजन ने कहा, "बहुत सोच-समझकर टेलीग्राम को बैन करने का निर्णय लिया गया है। परीक्षाओं को लेकर यह एक एहतियाती कदम है। इस कदम से सुचारू रूप से परीक्षा कराने में सफलता मिलेगी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार करने पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा, "ममता को भी अब यह बात समझनी चाहिए। पार्टी नेताओं, चुने हुए सांसदों और विधायकों को किसी की निजी संपत्ति की तरह नहीं माना जा सकता। निजी संपत्तियों वाले विचार से पार्टियों को बाहर निकलना होगा और शीर्ष नेतृत्व को नेताओं से संवाद करना होगा और उनकी राय पर निर्णय लेना होगा। पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जैसी हालत है, वैसे ही देश के कई राज्यों में नेता सामना कर रहे हैं। इसलिए, यह एक सबक भी है कि जो भी पार्टी आंतरिक लोकतंत्र समाप्त करती है, उसे गंभीर नतीजों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।"
पुलिस द्वारा टीएमसी कुछ बैंक खातों को फ्रीज करने के आदेश पर राजीव रंजन ने कहा, "यह सामान्य प्रक्रिया है। पार्टी किसके साथ है, अब मसला अहम हो गया है। ऐसे में बैंक खातों के संचालन को लेकर एक प्रक्रिया है।"
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा राहुल गांधी का साथ देने वाली पार्टियों के नुकसान होने वाले बयान पर जेडीयू प्रवक्ता ने कहा, "कांग्रेस समेत कई क्षेत्रीय दलों में एक समानता है कि कभी भी फैसले लोकतांत्रिक तरीके से नहीं लिए जाते। इन पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो चुका है। कार्यकर्ताओं से शीर्ष नेताओं का संवाद बिल्कुल नहीं है। इसलिए कांग्रेस शासित राज्यों में कांग्रेस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिन राज्यों में इंडिया ब्लॉक के साथी दलों की सरकारें हैं या विपक्ष में हैं, वहां भी स्थिति ठीक नहीं है।"
--आईएएनएस
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