नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन, शांति और समानता के संदेश पर मंथन

नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन, शांति और समानता के संदेश पर मंथन

नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर गांधी मंडेला फाउंडेशन (जीएमएफ) ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन (यूएसआई) में 'नेशनल पीस कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन किया। इस सम्मेलन में शांति, न्याय, समानता और मानवाधिकारों के वैश्विक मूल्यों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में देश-विदेश के राजनयिकों, कानूनविदों, आध्यात्मिक नेताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत नेल्सन मंडेला को पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर गांधी मंडेला फाउंडेशन के महासचिव एडवोकेट नंदन झा ने फाउंडेशन के उद्देश्यों और सामाजिक पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के विचार केवल पुस्तकों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन गांधी और मंडेला के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए नियमित रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके तहत रविवार को फिजिकल ट्रेनिंग सेशन और समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में शांति, अहिंसा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष और गांधी मंडेला पुरस्कार जूरी के चेयरमैन जस्टिस के. जी. बालकृष्णन ने कहा कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला मानवता के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनकी शिक्षाएं आज भी दुनिया को सामाजिक और नैतिक दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने दोनों नेताओं की विरासत को मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।

आचार्य लोकेश मुनि ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व शांति के लिए सबसे पहले व्यक्ति के भीतर शांति जरूरी है। उन्होंने कहा कि हिंसा की शुरुआत मन से होती है और इसे रोकने के लिए बचपन से ही शांति, नैतिकता और मूल्यों पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए।

यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एमजीआईईपी) के निदेशक डॉ. ओबिजिओफोर एगिनाम ने कहा कि नेल्सन मंडेला ने अपना पूरा जीवन न्याय, समानता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि मंडेला का नेतृत्व और उनका माफ करने तथा मेल-मिलाप का संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।

गांधी मंडेला फाउंडेशन के नेशनल प्रेसिडेंट और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि भारत महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण विकास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के उद्देश्य को आगे बढ़ा रही हैं।

फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति की पूर्व निदेशक डॉ. सविता सिंह ने गांधीवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के अपने अनुभव साझा किए और नेल्सन मंडेला से जुड़े अपने संस्मरण भी बताए।

गांधी मंडेला फाउंडेशन महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के सत्य, अहिंसा, स्वतंत्रता, नागरिक अधिकार, न्याय और समानता के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। फाउंडेशन शांति और समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को गांधी मंडेला अवॉर्ड से सम्मानित करता है।

फाउंडेशन की ओर से अब तक दलाई लामा और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रिगोबर्टा मेनचू तुम जैसी हस्तियों को यह सम्मान दिया जा चुका है। गांधी मंडेला अवॉर्ड जूरी की अध्यक्षता जस्टिस के. जी. बालकृष्णन करते हैं, जिसमें भारत, नेपाल और बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं।

--आईएएनएस

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