Pretam Singh Lodhi Statement : मध्य प्रदेश में विधायक और आईपीएस अधिकारी के बीच विवाद: आईपीएस एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध

विधायक के बयान से प्रशासन-राजनीति टकराव, आईपीएस एसोसिएशन का विरोध
मध्य प्रदेश में विधायक और आईपीएस अधिकारी के बीच विवाद: आईपीएस एसोसिएशन ने जताया कड़ा विरोध

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सत्ता और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी के कथित तौर पर एक विवादित बयान ने पूरे प्रदेश में बवाल खड़ा कर दिया है। मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने इसका कड़ा विरोध जताया।

विधायक ने शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र के एसडीओपी (अनुविभागीय पुलिस अधिकारी) डॉ. आयुष जाखड़ (आईपीएस) पर अमर्यादित और धमकी भरी टिप्पणी की है। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है।

मामला 16 अप्रैल को शिवपुरी के करैरा में शुरु हुआ। विधायक प्रीतम सिंह लोधी के पुत्र दिनेश लोधी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी थार गाड़ी से पांच लोगों (तीन पुरुष और दो युवतियां) को टक्कर मार दी, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

पुलिस ने दिनेश लोधी के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने (रैश ड्राइविंग) का मामला दर्ज किया। करैरा के एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ ने मामले की जांच के तहत दिनेश लोधी से पूछताछ की और उन्हें दुर्घटना स्थल पर भी ले गए। एसडीओपी ने नियम के अनुसार ब्लैक फिल्म, हूटर आदि पर चालान भी काटा और ड्राइविंग लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की।

इस कार्रवाई से नाराज विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में एसडीओपी आयुष जाखड़ पर कथित तौर पर अमर्यादित तीखा हमला किया। उन्होंने आगे धमकी देते हुए कहा कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जवाब दिया जाएगा। एक अन्य बयान में उन्होंने यहां तक कहा कि 5-10 हजार लोगों को लेकर एसडीओपी के बंगले का घेराव करेंगे और उसे गोबर से भर देंगे।

इस अमर्यादित भाषा और धमकी भरे बयान पर मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। एसोसिएशन के अध्यक्ष चंचल शेखर ने एक प्रेस नोट जारी कर विधायक के आचरण की निंदा की। प्रेस नोट में कहा गया है कि नव नियुक्त आईपीएस अधिकारी डॉ. आयुष जाखड़ और उनके परिवार के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां तथा धमकियां पूर्णतः अमर्यादित और अशोभनीय हैं। यह एक जनप्रतिनिधि के पद की मर्यादा के विपरीत है।

एसोसिएशन ने आगे कहा, "सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। ऐसी अभद्र भाषा और धमकीपूर्ण व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। इससे प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और अधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।" एसोसिएशन ने उचित कार्रवाई की मांग की है और इस घटना को सिविल सेवा दिवस (21 अप्रैल) के दिन होने पर और अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

विवाद बढ़ने के बाद एसडीओपी आयुष जाखड़ ने मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने केवल कानून के अनुसार कार्यवाही की है। उन्होंने किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी से इनकार किया और कहा कि जांच निष्पक्ष रूप से चल रही है।

--आईएएनएस

 

 

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