मुजफ्फरनगर, 16 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता, विकास और सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रीराम मंदिर के चढ़ावा विवाद के बाद एसआईटी के गठन को स्वागतयोग्य बताया है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में आरोप लगाए जाते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन सही है। इससे तथ्यों की सही जानकारी सामने आती है और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का रास्ता साफ होता है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश में आईआईटी बनाने के बजाय एसआईटी बनाए जाने संबंधी टिप्पणी पर अनिल कुमार ने कहा कि समाजवादी पार्टी को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2012 से 2017 तक जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब कितनी नई आईआईटी या उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता की कमी थी और समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाने के आरोप लगते रहे। साथ ही कई भर्ती घोटाले भी सामने आए, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं दिया जाता था।
मंत्री ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों जैसे गंभीर मामलों की भी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी थी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता इन सभी घटनाओं को भली-भांति जानती है और यही कारण है कि लोगों ने राज्य में बदलाव के लिए भाजपा को समर्थन दिया। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार हर मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देती है।
अनिल कुमार ने कहा कि आज समाजवादी पार्टी प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी है, लेकिन उसके पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल राजनीतिक बयानबाजी के माध्यम से लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी आज पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की बात कर रही है, लेकिन जब उसे सत्ता मिलती है तो वह इन्हीं वर्गों को भूल जाती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही अंतिम निर्णय करती है और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगा।
मंत्री ने कहा कि जो दल आज संविधान और आरक्षण बचाने की बात कर रहे हैं, उन्होंने सत्ता में रहते हुए इन मुद्दों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एक दलित सांसद द्वारा आरक्षण पदोन्नति विधेयक को फाड़े जाने की घटना आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है और उससे जुड़े कई सवाल अब तक अनुत्तरित हैं।
अनिल कुमार ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य सरकार ने लगभग साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है और सभी वर्गों के युवाओं को समान अवसर दिए जा रहे हैं। सरकार सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। उन्होंने दावा किया कि आज आम जनता स्वयं कह रही है कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास, सुरक्षा और सुशासन के माध्यम से प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।
--आईएएनएस
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