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मार्को रुबियो-जयशंकर वार्ता पर मनीष तिवारी बोले, भारत की चिंताओं के प्रति अमेरिका असंवेदनशील

मार्को रुबियो-जयशंकर वार्ता पर मनीष तिवारी बोले, भारत की चिंताओं के प्रति अमेरिका असंवेदनशील

चंडीगढ़, 14 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत पर प्रतिक्रिया दी।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आईएएनएस से कहा, "अगर आप अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत का विवरण देखें, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह भारत की चिंताओं के प्रति गहरी असंवेदनशीलता को दर्शाता है। इसमें कोई पछतावा नहीं है, कोई अफसोस नहीं है, कोई सहानुभूति नहीं है, कोई हमदर्दी नहीं है, बल्कि एक साफ संदेश दिया गया है कि जो कोई भी होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। असल में इसका मतलब यह है कि जिस टैंकर पर अमेरिका ने हमला किया, वह कथित तौर पर उस प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहा था।

मनीष तिवारी ने एक्स पर लिखा, कोई पछतावा नहीं, कोई अफ़सोस नहीं, कोई हमदर्दी नहीं, कोई सहानुभूति नहीं। बातचीत का अंदाज़ अचानक, रूखा और टकराव वाला था। मार्को रुबियो इससे ज़्यादा आक्रामक नहीं हो सकते थे। बातों के बीच छिपा संदेश यह है कि भारतीय नाविकों के साथ जो हुआ, उसके लिए वे खुद ज़िम्मेदार थे। जिस देश को आप दोस्त कहते हैं, उसके साथ बातचीत में ऐसी भाषा का इस्तेमाल शायद ही किया जाता है। कमज़ोर या अस्पष्ट रवैया अपनाने के बजाय, जयशंकर को इस बातचीत का अपना ब्यौरा ज़रूर सामने रखना चाहिए। यह जानना दिलचस्प होगा कि क्या जयशंकर इस रूखेपन के सामने डटे रहे।"

वहीं, पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में जी-7 समिट के दौरान मुलाकात पर कांग्रेस सांसद ने कहा, "जब से अमेरिकी प्रशासन ने कामकाज संभाला है, भारत के साथ रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। चाहे वह कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को वापस भेजना हो, भारत पर टैरिफ लगाना हो या दक्षिण एशिया में अस्थिरता के केंद्र के साथ नजदीकी बढ़ाना हो। यह वही देश है, जो लंबे समय से आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है और पूरे क्षेत्र में बहुत खतरनाक और जहरीला माहौल बनाने के लिए जिम्मेदार है। उम्मीद है कि अगर पीएम मोदी की उनसे मुलाकात होती है, तो वे भारत की चिंताओं को बहुत स्पष्ट और मजबूती से रखेंगे।"

--आईएएनएस

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