कोच्चि, 10 जुलाई (आईएएनएस)। कुंभ मेले से वायरल हुई मोनालिसा भोसले को पुलिस सुरक्षा देने वाले अपने अंतरिम आदेश को केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वापस ले लिया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पुलिस मोनालिसा द्वारा याचिका में दिए गए पते और संपर्क विवरण के आधार पर उन्हें तलाश नहीं कर पाई। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने सरकार की ओर से पेश वकील द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद अंतरिम सुरक्षा आदेश को रद्द कर दिया कि पुलिस द्वारा मोनालिसा से संपर्क करने की कई कोशिशें असफल रही हैं। राज्य सरकार के अनुसार अदालत के आदेश के तहत सुरक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों के बावजूद अधिकारी याचिकाकर्ता का पता नहीं लगा सके।
सरकारी वकील ने अदालत में कहा, "पुलिस सुरक्षा देना चाहती थी, लेकिन याचिकाकर्ता से संपर्क नहीं हो पाया। यह एक नियमित स्थिति बन गई है। जब भी वह पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर अदालत आती हैं, पुलिस उनसे संपर्क नहीं कर पाती है।"
मोनालिसा के वकील ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की दलीलों को लेकर उन्हें अपनी मुवक्किल से कोई निर्देश नहीं मिला है। इसके बाद अदालत ने 19 जून को दिए अपने अंतरिम आदेश को वापस ले लिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर मोनालिसा लिखित रूप से पुलिस से सुरक्षा मांगती हैं तो अधिकारियों को उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करानी होगी।
मोनालिसा ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि मुस्लिम युवक मोहम्मद फरमान से शादी के बाद उन्हें मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नफरत भरे अभियानों का निशाना बनाया जा रहा है।
महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर उनके रुद्राक्ष की माला बेचने के वीडियो वायरल होने के बाद मोनालिसा देशभर में प्रसिद्ध हो गई थीं। इसके बाद उन्हें "वायरल कुंभ मेला स्टार" के नाम से जाना जाने लगा। बाद में मोनालिसा ने फरमान से शादी कर ली थी, जिसके बाद उसकी मुश्किलें बढ़ गई।
इस साल की शुरुआत में फिल्म शूटिंग के लिए केरल में रहने के दौरान मोनालिसा ने पुलिस सहायता मांगी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनका परिवार मोहम्मद फरमान से उनकी शादी का विरोध कर रहा है।
मोनालिसा के पिता ने मध्य प्रदेश में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फरमान ने उनकी बेटी का अपहरण किया है। इसके बाद दंपति ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया।
इससे पहले अदालत ने फरमान को एक महीने की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वह मध्य प्रदेश की सक्षम अदालतों से नियमित राहत प्राप्त कर सकें।
दंपति ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का भी रुख किया है और आरोप लगाया है कि मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र फर्जी बनाया गया, ताकि फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल किया जा सके।
पिछले सप्ताह केरल हाईकोर्ट ने फरमान की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इससे पहले मध्य प्रदेश की पॉक्सो अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद दोनों की कानूनी लड़ाई अब दो राज्यों की अदालतों में चल रही है।
--आईएएनएस
एएमटी/वीसी






