बेंगलुरू, 11 अगस्त (आईएएनएस)। कई कन्नड संगठनों ने 13 अगस्त को बुलाई गई ‘कर्नाटक बंद’ का समर्थन किया है। यह बंद 'मेकेदातु पेयजल परियोजना' को लेकर तमिलनाडु के विरोध के संदर्भ में बुलाया गया है, हालांकि कन्नड संगठनों में इस बात को लेकर मतभेद है कि बंद जरूरी है या नहीं, क्योंकि मौजूदा समय में राज्य में अच्छी बारिश भी हो रही है और जल स्तर भी बढ़ा है।
क्षेत्रीय संगठन कर्नाटक रक्षणा वेदिके (केआरवी) के नेता प्रवीण कुमार शेट्टी ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में हुई भारी बारिश को देखते हुए बंद जरूरी मालूम नहीं पड़ता। राज्य में जल की स्थिति भी लगातार सुधर रही है। उनका संगठन इस संबंध में कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक करेगा। इसके बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेगा।
शेट्टी ने कहा, “जब बंद का आह्वान किया गया था, तब राज्य में बारिश नहीं हो रही थी, लेकिन अब राज्य में बारिश शुरू हो चुकी है। अब केआरएस जलाशय भी बढ़ चुका है और काबिनी बांध भी भर चुका है। तमिलनाडु की तरफ से 3 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है।”
उन्होंने कहा कि राज्यव्यापी बंद का असर समाज के हर तबके के लोगों पर पड़ेगा, जिसमें प्रमुख रूप से दिहाड़ी मजदूर, कामगर, होटल संचालक, छोटे दुकानदार मालिक शामिल हैं और इसमें वो लोग भी शामिल हैं, जो हर दिन काम करते हैं।
शेट्टी ने कहा, “मजदूर, होटल संचालक और जो लोग छोटे दुकान चलाते हैं और वो सभी लोग, जो रोज काम करके पैसा कमाते हैं। हम ऐसा नहीं कह सकते हैं कि हमें बंद की जरूरत नहीं है। जब हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, तो हम इसे करेंगे भी। हम इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे और वटल नागराज को भी मनाने की की कोशिश करेंगे।”
शेट्टी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि वो इस संबंध में आगामी दिनों में कन्नड संगठनों से बात करेंगे। इसके बाद आगे हम इस बारे में बैठक भी करेंगे।
उन्होंने कहा, “हम कन्नड कार्यकर्ता वटल नागराज से मुलाकात कर इस बारे में चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो हमसे इस बारे में चर्चा करेंगे। अब हमें बस उस पल का इंतजार है।”
इस बीच, कई कन्नड संगठनों ने सामने आकर 13 अगस्त को बंद का ऐलान किया है। यह बंद मुख्य रूप से मेकेदातू परियोजना को लेकर तमिलनाडु के विरोध के बाद बुलाया गया है।
कन्नड कार्यकर्ता वटल नागराज ने बेंगलुरू और कर्नाटक के लोगों से अपील की है कि वो सक्रिय रूप से इस बंद में हिस्सा लें। इस परियोजना को लेकर सड़कों पर भी उतरें।
नागराज ने कहा कि यह प्रदर्शन हमारे लिए जरूरी हो जाता है, क्योंकि तमिलनाडु ने मेकेदातू परियोजना को लेकर विरोध जताया है। उनके मुताबिक, इस विरोध को लेकर एक तार्किक कारण दिया जाना चाहिए।
नागराज ने कहा, “हम यह प्रदर्शन मेकेदातू परियोजना को लेकर बुला रहे हैं। तमिलनाडु ने भी इस परियोजना को लेकर विरोध जताया है। लेकिन, अभी तक यह स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि इससे आने वाले दिनों में किस तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।”
उन्होंने कहा, “अगर मेकेदातू परियोजना को लागू नहीं किया गया, तो बेंगलुरू में जल संकट पैदा होगा। इसके बाद आप कहां जाएंगे? यह प्रदर्शन हम बेंगलुरू के लोगों के लिए कर रहे हैं। ”
नागराज ने सभी समुदायों और विभिन्न भाषाओं के लोगों से अपील करते हुए कहा कि बेंगलुरू में रहने वाले सभी लोग बंद का समर्थन करें, क्योंकि पानी का संकट मौजूदा समय चिंता का विषय है।
हालांकि, कर्नाटक बंद को लेकर कन्नड संगठनों में मत एकता है।
मांड्या के संगठन ने कर्नाटक बंद का ऐलान किया है। मांड्या में कन्नड सेना ने कहा कि बंद प्रभावी रहेगा। वहीं, हितरक्षण वेदिके इस संबंध में कोई भी फैसला करने से पहले एक बड़ा ऐलान भी करेगा।
कर्नाटक रक्षणा वेदिके के अध्यक्ष टी.आर. नारायण गौड़ा ने कहा कि हमारा संगठन आगामी दिनों में दिल्ली के जंतर मंतर इलाके पर विरोध प्रदर्शन करेगा। कन्नड कार्यकर्ता गोविंदा ने भी कहा कि हम इस बंद का समर्थन नहीं करेंगे।
ओला उबर कैब से जुड़े एसोसिएशन ने संकेत दिया है कि वो भी बंद का समर्थन करने के लिए उत्सुक नहीं हैं।
--आईएएनएस
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