मुंबई, 25 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि 2026-27 के वार्षिक बजट के महज तीन महीने बाद महायुति सरकार द्वारा 97,706.40 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश करने का कदम महाराष्ट्र के वित्तीय अनुशासन में आई गिरावट को उजागर करता है।
पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक ऋण लगभग 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने, 60,000 करोड़ रुपए के वार्षिक ब्याज बोझ और राज्य के खजाने से मनमाने ढंग से खर्च किए जाने के कारण महाराष्ट्र सरकार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में कहा कि वर्तमान स्थिति उस अर्थशास्त्र के छात्र की तरह है, जो परीक्षा के दौरान अपनी उत्तर पुस्तिका में एक के बाद एक कई अनुपूरक प्रश्न जोड़ता है, और परिणाम घोषित होने पर मुश्किल से उत्तीर्ण हो पाता है।
मुख्यपत्र 'सामना' में टिप्पणी की गई, "महाराष्ट्र की अनुपूरक प्रश्न मांगने वाली सरकार अनुपूरक प्रश्नों की मांग में रिकॉर्ड बनाकर राज्य की तबाह अर्थव्यवस्था का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ा रही है।"
संपादकीय में तर्क दिया गया कि किसी भी सरकार के लिए बजट के तुरंत बाद पूरक मांग बेहद शर्मनाक होता है।
संपादकीय में कहा गया, "अनुत्पादक गतिविधियों पर अंधाधुंध खर्च के कारण राज्य सरकार की वित्तीय योजना पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। महाराष्ट्र कभी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन पिछले चार वर्षों में यह प्रतिष्ठा पूरी तरह से धूमिल हो गई है। इन चार वर्षों के दौरान महायुति सरकार ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपए की पूरक मांगें लाने का सिलसिला जारी रखा है। यह बजट से अधिक खर्च का विश्व रिकॉर्ड है।"
शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि आदर्श रूप से यदि वित्तीय वर्ष के अंत में आवंटित धनराशि कम पड़ जाए या कोई नई योजना अचानक शुरू हो जाए तो अगले बजट से कुछ ही दिन पहले पूरक मांगों का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन आज आवंटन जानबूझकर मुख्य बजट में छिपाए जाते हैं, और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूरक मार्गों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए की मांग की जाती है। इस बार सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। अगले बजट में पूरे नौ महीने शेष रहते हुए सरकार के राजस्व और व्यय अनुमान पहले तीन महीनों में ही धराशायी हो गए।
उन्होंने कहा कि जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सत्ता में थी और उसने काफी कम पूरक मांगें रखी थीं, तब मौजूदा सरकार के नेताओं (जो उस समय विपक्ष में थे) ने वित्तीय अनुशासन के पूर्ण पतन का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की थी।
संपादकीय में आगे कहा गया, "आज वही विपक्षी नेता राज्य के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल के चार वर्षों में पूरक मांगें 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाने के बावजूद वह अब इसे वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं मानते।"
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पूरक उपलब्धि समर्थक सरकार पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड बना रही है और उस राज्य की अर्थव्यवस्था को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर रही है जो कभी अपनी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था। सरकार खुलेआम उस राज्य की आर्थिक विरासत को नष्ट कर रही है जिसे कभी वित्तीय ईमानदारी के लिए सम्मान दिया जाता था।
--आईएएनएस
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