मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना के पार्टी चिह्न और नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि कपिल सिब्बल द्वारा कोर्ट में रखे गए तर्कों से साफ है कि दलबदल कानून एकनाथ शिंदे गुट पर भी लागू होता है और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग के फैसले को बड़ी गलती बताते हुए कहा कि पार्टी का मतलब सिर्फ विधायक नहीं होते, बल्कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की कार्यकारिणी होती है।
शिवसेना पार्टी के चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "यह संतोषजनक है। जिस तरह से कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सामने हमारी पार्टी का पक्ष रखा, कानून के तहत कई मिसालों का हवाला देते हुए उससे साबित होता है कि असल में दलबदल उन पर भी लागू होता है, और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें तब अयोग्य घोषित नहीं किया गया था, लेकिन अब किया जाना चाहिए। आज भी चुनाव आयोग के गलत फैसलों की वजह से हमारी पार्टी का सिंबल और नाम उन्हें सौंप दिया गया। साधारण सी बात है कि विधायक गए ना, पार्टी का मतलब विधायक तो नहीं है। पार्टी की कार्यकारणी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर होती है। सारी बातें संविधान के तहत किया गया।
शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद ने कहा, "अनिल देसाई और मैंने जाकर एक लेटर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह संवैधानिक नहीं है। यह 10वीं अनुसूची के तहत लिखी बातों के अनुसार नहीं है। इसका मतलब दो-तिहाई सांसद या दो-तिहाई विधायक नहीं है। इसका मतलब है दो-तिहाई राजनीतिक पार्टी।"
अरविंद सावंत ने कहा कि पार्टी को खुद ही अलग होना चाहिए। जब पार्टी यह फैसला लेती है कि 'हम यहां एक होना चाहते हैं,' और अगर पार्टी के दो-तिहाई लोग मंजूरी देते हैं, मतलब हमारे ऑफिस बेयरर्स से लेकर सांसद और विधायक तक सभी, तो यह मान्य है।
साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे पर दिए गए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने ही मुंडे को पार्टी नहीं छोड़ने की सलाह दी थी।
--आईएएनएस
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