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महाराष्ट्र: कांग्रेस ने मुंबादेवी वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर गड़बड़ियों की ओर इशारा किया

महाराष्ट्र:

मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकलिंगम और बृहन्मुंबई नगर निगम की कमिश्नर अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर 186 मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र में चल रही 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

14 अगस्त, 2026 के इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि फॉर्म बांटने और वेरिफिकेशन अभियान के दौरान कुछ बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने बड़ी गड़बड़ियां की हैं।

पटेल के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से लगभग 39 प्रतिशत (यानी करीब 2,41,959 में से 95,538 लोग) को चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में बिना सही फील्ड वेरिफिकेशन के ही 'हमेशा के लिए दूसरी जगह चले गए' या 'मृत' की श्रेणी में डाल दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी गड़बड़ियां गंभीर चिंता का विषय हैं, खासकर तब जब एसआईआर प्रक्रिया का मकसद यह पक्का करना हो कि सभी योग्य और असली मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल हों।

पटेल ने मुंबई शहर में 37.8 प्रतिशत और मुंबई उपनगर में 34.4 प्रतिशत फॉर्म जमा न होने, और साथ ही उन फॉर्मों का भी जिक्र किया जिनमें सुधार की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है और भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। आशंका है कि महाराष्ट्र के लगभग 1.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं और ईसीआई को एसआईआर प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ानी चाहिए।

पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर प्रपत्रों का उचित वितरण न होना और वैध निवासियों को समय से पहले विस्थापित घोषित करना, बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है।

उन्होंने उन बीएलए की तत्काल समीक्षा की मांग की, जिन्होंने एसआईआर प्रपत्र वितरित नहीं किए या बिना सत्यापन के मतदाताओं को 'स्थायी रूप से विस्थापित' घोषित कर दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश देने की मांग की कि प्रत्येक पात्र मतदाता को एसआईआर प्रपत्र प्राप्त हो, और वितरण, संग्रह, सत्यापन और डिजिटलीकरण के लिए पर्याप्त समय देने हेतु एसआईआर की समय सीमा 17 अगस्त, 2026 से आगे बढ़ाई जाए।

तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए पटेल ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी मतदाता सूची बनाए रखने और संवैधानिक मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए समय सीमा बढ़ाना और गहन समीक्षा करना आवश्यक है।

--आईएएनएस

एमएस/