महाराष्ट्र: मनोज जरांगे ने कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने को लेकर राज्य सरकार पर साजिश का आरोप लगाया

महाराष्ट्र: मनोज जरांगे ने कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने को लेकर राज्य सरकार पर साजिश का आरोप लगाया

जालना/मुंबई, 6 अगस्त (आईएएनएस)। मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन, विशेष रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जुड़े मंत्रियों द्वारा, मराठा समुदाय को निशाना बनाने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची गई है।

जाति जांच समिति द्वारा मराठवाड़ा क्षेत्र की चार महिला मराठा जन प्रतिनिधियों के कुनबी जाति प्रमाण पत्र रद्द किए जाने के बाद जारंगे पाटिल ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने सरकार पर जानबूझकर प्रमाण पत्र जारी करने और बाद में उन्हें रद्द करने का आरोप लगाया। यह सब उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने और उस समुदाय के साथ विश्वासघात करने की एक सोची-समझी साजिश थी जिसने उन्हें सत्ता में लाया था।

जरांगे पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के भीतर से ही एक बड़ी, सोची-समझी साजिश रची गई है।

उन्होंने घोषणा की कि मराठों द्वारा चुनी गई सरकार फिर उनके साथ विश्वासघात करती है। हम 2029 में सबसे बड़ा बदला लेंगे।

मीडिया प्रतिनिधियों को दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए विशिष्ट मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि ज्योति शिंदे का प्रमाण पत्र राजनीतिक दुर्भावना और व्यापक गलतफहमी के कारण रद्द किया गया था।

उन्होंने ऐतिहासिक रिकॉर्डों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने चुनाव हारने के बाद अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से फोन करके प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे सबूतों जितने सबूत किसी भी सरकारी अधिकारी के पास नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वैध प्रमाणपत्रों को फर्जी क्यों बताया जा रहा है।

इन आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से इनकार किया और स्पष्ट किया कि जाति जांच समिति सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करती है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने पत्रकारों से कहा कि मैंने मनोज जरंगे पाटिल की पूरी टिप्पणी नहीं सुनी है, लेकिन मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि जब प्रमाणपत्र जाति जांच समिति के पास जाते हैं, तो वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों के तहत कार्य करते हैं। उन्होंने आगे कहा, "राज्य सरकार इसके कामकाज में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करती है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि हालांकि उनके पास रद्द किए गए कुनबी प्रमाणपत्रों की सटीक संख्या नहीं है, लेकिन समिति विभिन्न श्रेणियों में नियमित रूप से 10 से 12 प्रतिशत प्रमाणपत्रों को अस्वीकार करती है, जो कभी-कभी गैर-कुनबी ओबीसी प्रमाणपत्रों के लिए 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इसलिए, कोई भी प्रमाणपत्र जानबूझकर अस्वीकार नहीं किया जा रहा है।

--आईएएनएस

एमएस/