मुंबई, 17 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट उपसमिति ने राज्य में विभिन्न धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज 44 मामलों को वापस लेने की सिफारिश की है। सांस्कृतिक कार्य मंत्री एवं उपसमिति के अध्यक्ष आशीष शेलार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
राज्य सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा कर उपयुक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश के लिए इस कैबिनेट उपसमिति का गठन किया था। इससे पहले हुई बैठक में समिति ने 77 मामलों को वापस लेने की अनुशंसा की थी, जबकि बुधवार की बैठक में 44 अतिरिक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई।
बैठक के दौरान पुलिस में दर्ज मामलों से संबंधित कुल 133 आवेदनों की समीक्षा की गई। इनमें से 44 आवेदकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया।
बैठक में विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव, लोक अभियोजन निदेशालय के निदेशक, गृह विभाग के अधिकारी और राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
समिति ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध, गंभीर आपराधिक मामले तथा व्यक्तिगत और दीवानी विवादों से जुड़े मामलों को राज्य सरकार की नीति के तहत वापस नहीं लिया जा सकता। इसलिए ऐसे मामलों को वापस लेने की मांग अस्वीकार कर दी गई।
समिति ने यह भी बताया कि सरकारी प्रस्तावों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय केवल बॉम्बे हाईकोर्ट ही ले सकता है। इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है।
133 आवेदनों में से 14 मामलों को पुनर्विचार के लिए संबंधित क्षेत्रों की पुलिस उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समितियों के पास भेजने की सिफारिश की गई है। वहीं, समीक्षा के लिए आए 35 मामलों में कुछ का पहले ही निपटारा हो चुका था, जबकि 32 मामले समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर पाए गए। अब केवल आठ मामले विचाराधीन हैं।
आशीष शेलार ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, आंदोलनकारियों और वैचारिक आंदोलनों में शामिल लोगों पर कई बार अनावश्यक रूप से मामले दर्ज कर दिए जाते हैं। ऐसे लोगों को बेवजह के मुकदमों से राहत दिलाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
बुधवार को जिन मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई है, उनमें गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी उत्सव, सामाजिक कार्यक्रमों, गौ-रक्षा आंदोलनों और श्रमिक आंदोलनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
--आईएएनएस
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