महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें, तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार: रूबल नागी

महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें, तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार: रूबल नागी

मुंबई, 27 जून (आईएएनएस)। समाजसेवी, लेखिका और शिक्षाविद रूबल नागी ने महिला सशक्तीकरण, समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में उनकी भागीदारी को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज की भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और अब समय आ गया है कि 'जेंडर इक्वालिटी' को केवल महिलाओं और पुरुषों की तुलना तक सीमित न रखकर वास्तविक समानता के रूप में देखा जाए।

रूबल नागी ने आईएएनएस से कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं को जोड़ने और उन्हें एक-दूसरे से सीखने का अवसर देना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि जब महिलाएं आपस में जुड़ती हैं, अपने अनुभव साझा करती हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाती हैं, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।

महिला सशक्तीकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर उन क्षेत्रों में जिन्हें लंबे समय से पुरुष-प्रधान माना जाता रहा है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं और पुरुषों के बीच प्रतिस्पर्धा की सोच सही नहीं है।

उन्होंने कहा, "अगर कोई क्षेत्र पुरुष-प्रधान कहलाता है, तो यह भी याद रखना चाहिए कि उन पुरुषों को जन्म देने वाली भी एक मां ही होती है। इसलिए हमें तुलना की मानसिकता से बाहर निकलना होगा।"

रूबल नागी ने कहा कि उनका हमेशा से मानना रहा है कि महिलाओं को पुरुषों से आगे निकलने की दौड़ नहीं लगानी चाहिए, बल्कि दोनों को कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए। तभी विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा है, जहां महिलाएं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर रही हों। चाहे सेना हो, राजनीति, कॉर्पोरेट सेक्टर, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर या कोई अन्य पेशा, महिलाएं हर जगह अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह महिलाओं की अपनी पसंद और क्षमता पर निर्भर करता है कि वे किस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं।

रूबल नागी ने कहा कि लगातार प्रयासों और बदलती सोच की वजह से महिलाओं और पुरुषों के बीच अवसरों का अंतर तेजी से कम हो रहा है और आने वाले समय में यह दूरी और भी घटेगी। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां और महिलाएं पहले जैसी सोच नहीं रखतीं। अब महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़ी होकर आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की बेटियों ने न केवल देश में, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और देश का नाम रोशन किया है। यह भारत की महिलाओं की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी मजबूत होती जाएगी।

--आईएएनएस

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