खेत और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जैविक-प्राकृतिक खेती ही है विकल्प : डॉ. प्रेम कुमार

खेत और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जैविक-प्राकृतिक खेती ही है विकल्प : डॉ. प्रेम कुमार

गयाजी, 16 जून (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मंगलवार को कहा कि खेत और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती ही विकल्प है। रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग और जैविक उपादानों जैसे कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग नहीं करने से धीरे-धीरे हमारे खेत का स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैविक कार्बन 0.5 प्रतिशत से भी कम हो गया है जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मंगलवार को गयाजी के मानपुर में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण भवन, सभागार में खेत बचाओ अभियान अंतर्गत "प्राकृतिक खेती जिला कार्यशाला" के उद्घाटन समारोह में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके अतिरिक्त जैविक खेती प्रोत्साहन योजना का संचालन भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि गया जिला में वर्तमान में 38.25 लाख रुपये की लागत से बांकेबाजार, बोधगया, टनकुप्पा, टिकारी एवं फतेहपुर प्रखंड के 535 किसानों द्वारा 25 क्लस्टर में 500 हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है, जिसके प्रथम चरण का जैविक प्रमाणीकरण पूरा हो गया है। इसी प्रकार मानपुर, बोधगया, नगर, बेलागंज, खिजरसराय, फतेहपुर, गुरारु, मोहनपुर, बाराचट्टी, डोभी, शेरघाटी, गुरुआ, आमस, इमामगंज एवं डुमरिया सहित 15 प्रखंडों के 1875 किसानों के द्वारा 750 हेक्टेयर में 1.10 करोड़ रुपये की लागत से प्राकृतिक खेती कराई जा रही है।

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों से अपील की कि इस वर्ष कम से कम 25 प्रतिशत खेत में जैविक और प्राकृतिक तरीके से खेती करें क्योंकि अब अगर हम नहीं चेते तो आने वाला समय बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए अतरी क्षेत्र के विधायक रोमित कुमार ने कहा कि गाय का गोबर, गौमूत्र और अन्य जैव उपादानों से तैयार जैव उर्वरक तथा जैविक खाद से खेती करने से हम खेतों के साथ ही अपना स्वास्थ्य भी सुरक्षित रख सकते हैं।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती बहुत ही सरल है और किसान एक गाय के गोबर और गौमूत्र का उपयोग कर 15 से 20 एकड़ की खेती कर सकते हैं।

--आईएएनएस

एमएनपी/पीएम