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शेल्फ से नॉलेज हब तक : 10,000 किताबों वाली केरल लोक भवन की पब्लिक लाइब्रेरी का उद्घाटन

शेल्फ

तिरुवनंतपुरम, 21 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शुक्रवार को 'थुंचन स्मृति' का उद्घाटन किया। लोक भवन में स्थित यह खास लाइब्रेरी 10,000 से ज्यादा किताबों का संग्रह है, जो पहले अव्यवस्थित थी, लेकिन अब समाज के लिए एक उपयोगी संसाधन बन गई हैं।

मलयालम भाषा और साहित्य के जनक माने जाने वाले थुंचथ रामानुजन एझुथाचन के नाम पर बनी यह लाइब्रेरी राजभवन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास नई इमारत में स्थित है।

इस पहल का मकसद लोक भवन के कलेक्शन को पाठकों, शोधकर्ताओं, छात्रों, शिक्षकों और लेखकों के लिए सुलभ बनाना है।

सालों से तोहफे में मिली और लोक भवन द्वारा हासिल की गई किताबों से बने इस कलेक्शन में 4,000 से ज्यादा मलयालम और लगभग 6,000 अंग्रेजी किताबें शामिल हैं, साथ ही कई भारतीय भाषाओं की रचनाएं भी हैं।

इसमें साहित्य, इतिहास, संस्कृति, दर्शन और विज्ञान जैसे विषयों पर किताबें शामिल हैं। इनमें से कई किताबें पहले लोक भवन में अलग-अलग जगहों पर रखी हुई थीं।

अब उन्हें एक साथ लाकर, व्यवस्थित ढंग से सजाया और कैटलॉग किया गया है। इस तरह, जो कलेक्शन पहले बिखरा हुआ था, उसे अब पढ़ने, अध्ययन और शोध के लिए एक समर्पित लाइब्रेरी में बदल दिया गया है।

अर्लेकर ने कहा कि उनका विजन 'थुंचन स्मृति' को एक ऐसे ज्ञान और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जो केरल की समृद्ध विरासत और विविधता को दर्शाता हो।

उन्होंने कहा कि ये किताबें सिर्फ राजभवन परिसर में सुरक्षित रखे गए कलेक्शन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज द्वारा इनका सार्थक इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

केरल की कई प्रमुख साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों की मौजूदगी ने इस उद्घाटन को और भी खास बना दिया।

डायरेक्टर अदूर गोपालकृष्णन ने कहा कि एझुथाचन के नाम पर लाइब्रेरी का नाम रखने का फैसला बहुत सार्थक है, क्योंकि मलयालम भाषा और साहित्य के इतिहास में उनका अहम स्थान है।

कवि वी. मधुसूदनन नायर ने उम्मीद जताई कि यह लाइब्रेरी केरल के इतिहास, साहित्य और संस्कृति पर शोध करने वाले विद्वानों और छात्रों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।

लेखक जॉर्ज ओनाक्कुर ने कहा कि पढ़ने, भाषा और क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा देने में राज्यपाल की दिलचस्पी इस पहल के पीछे एक बड़ी प्रेरणा रही है।

रोजमेरी ने कहा कि किताबों, पढ़ने और साहित्य को एक साथ लाने की कोशिशें ज्यादा जीवंत सांस्कृतिक जगहें बनाने में मदद कर सकती हैं। 'थुंचन स्मृति' के जरिए लोक भवन ने अपने किताबों के कलेक्शन को एक नया सार्वजनिक मकसद दिया है। इसने राज्य की राजधानी में एक ऐसी नई जगह बनाई है, जहां किताबें, ज्ञान-विज्ञान और केरल की सांस्कृतिक यादें एक-दूसरे से मिल सकती हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम