तिरुवनंतपुरम, 21 सितंबर (आईएएनएस)। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में केरल में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के एक अहम फैसले का इंतजार किया जा रहा है। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह तय होना है कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई शुरू की जाए या नहीं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला जल्द ही ईडी की रिपोर्ट और एडवोकेट जनरल की कानूनी राय पर चर्चा करने के लिए बैठक कर सकते हैं। इस चर्चा से यह तय होने की उम्मीद है कि क्या विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो को सीधे एफआईआर दर्ज करनी चाहिए या आरोपों की शुरुआती जांच करनी चाहिए।
खबरों के अनुसार, कानूनी राय में कहा गया है कि 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत मामला दर्ज करने पर विचार किया जा सकता है। इसमें रिश्वत और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए शुरुआती सबूतों की ओर इशारा किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि किसी बिचौलिए या तीसरे पक्ष के जरिए पैसे लेने पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
माना जा रहा है कि इस राय में सुझाव दिया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी वीणा विजयन को मिले पैसों की जांच की जा सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इनका मकसद पिनाराई विजयन को फायदा पहुंचाना था। इसमें यह भी संकेत दिया गया है कि इन आरोपों के संबंध में वीणा विजयन और विधायक पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने पर विचार किया जा सकता है।
ईडी ने राज्य पुलिस प्रमुख को 25 पेज की रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई थी। खबरों के अनुसार, रिपोर्ट में भुगतान, वित्तीय रिकॉर्ड और व्हाट्सएपबातचीत का विवरण है, जिनके बारे में एजेंसी का दावा है कि वे उसके आरोपों का समर्थन करते हैं।
ईडी के अनुसार, 2016 और 2026 के बीच पिनाराई विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सीधे या उनकी बेटी की कंपनी 'एक्सलॉजिक' के जरिए अवैध भुगतान प्राप्त किए गए थे। एजेंसी ने पिनाराई विजयन, वीणा विजयन और पूर्व मंत्री मोहम्मद रियास सहित एक दर्जन से ज़्यादा लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
एडवोकेट जनरल की राय में यह भी कहा गया है कि जिन लेन-देन की जांच हो रही है, वे 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' में 2018 में हुए बदलावों से पहले और बाद के हैं, जिससे किसी भी संभावित जांच के लिए दोनों कानूनी व्यवस्थाओं के प्रावधान प्रासंगिक हो जाते हैं। सतीशन और चेन्निथला के बीच होने वाली बैठक से कार्रवाई की दिशा और जांच का दायरा तय होने की उम्मीद है।
इस बीच सीपीआई (एम) ने ईडी के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है और एजेंसी के निष्कर्षों के आधार पर राज्य-स्तरीय जांच का विरोध करने की उम्मीद है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी से मिली जानकारी की जांच की जानी चाहिए और कानून के अनुसार उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
--आईएएनएस
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