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छात्रों की समस्याओं के समाधान और शिक्षा में सुधार के सुझाव देने के लिए कैबिनेट की एक उप-समिति गठन: कर्नाटक सरकार

छात्रों

बेंगलुरु, 27 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को छात्रों की चिंताओं को सुनने और राज्य की शिक्षा प्रणाली में जरूरी सुधारों की सिफारिश करने के लिए एक कैबिनेट उप-समिति बनाने का फैसला किया।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और हज व वक्फ मंत्री यूटी खादर की अध्यक्षता में छात्रों के मुद्दों और शिक्षा सुधारों पर कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है। कैबिनेट उप-समिति के सदस्यों को 'छात्रों' और 'शिक्षा सुधारों' से जुड़ी चुनौतियों पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

यह कदम लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जवाब में उठाया गया है, जिसका मकसद शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लाना है। राज्य सरकार छात्रों की चिंताओं और आकांक्षाओं को समझना चाहती है और उचित सुधार लागू करना चाहती है।

मंत्री यूटी खादर की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति में स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा, उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी, गृह, आईटी और बीटी, ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे और चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास मंत्री शरण प्रकाश पाटिल सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री ने समिति को निर्देश दिया है कि वे छात्रों से बातचीत करें, उनकी समस्याओं, आकांक्षाओं और विचारों को सुनें, और छात्रों व युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से शिक्षा सुधारों की सिफारिश करें।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि राज्य का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है और सरकार उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जरूरी बुनियादी ढांचा और पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं की समस्याओं और भावनाओं को समझना चाहती है और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती है।

बंगारप्पा ने कहा कि छात्रों, युवाओं और आम जनता से सुझावों और प्रतिक्रिया का स्वागत किया जाएगा और उन्होंने सभी से युवा पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

समिति परीक्षा और भर्ती की निष्पक्षता, शिक्षा की लागत, फीस और कोचिंग नियमन, सार्वजनिक संस्थानों में बुनियादी ढांचा और गुणवत्ता, पाठ्यक्रम, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ाव, छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और भलाई और पहुंच व समानता जैसे मुद्दों की जांच करेगी और उन पर सिफारिशें देगी।

समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

--आईएएनएस

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