कर्नाटक काउंसिल के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया: बसवराज होरट्टी

कर्नाटक काउंसिल के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया: बसवराज होरट्टी

हुबली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद के पूर्व चेयरमैन बसवराज होरट्टी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें मजबूरी में अपने इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उस दिन इस्तीफा देने का मौका नहीं दिया गया, जिस दिन उन्होंने ऐसा करने की योजना बनाई थी।

हुबली में मीडिया से बात करते हुए होरट्टी ने कहा कि उन्होंने अपने इस्तीफे से जुड़ी सभी जानकारी गवर्नर को दे दी थी, लेकिन उन्हें इस बात की कोई सूचना नहीं मिली कि उनका इस्तीफा मंजूर हुआ है या नहीं।

होरट्टी ने कहा, "मैंने इस मामले में गवर्नर को सब कुछ बता दिया है। गवर्नर ने मुझे कोई सूचना नहीं दी है। उन्होंने यह नहीं बताया है कि मुझे पद से मुक्त कर दिया गया है या मेरा इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। जहां तक मुझे पता है, अगर मुझे प्रोटेम चेयरमैन नियुक्त किया गया है तो इसका मतलब है कि मेरा इस्तीफा मंजूर हो गया है।"

होरट्टी ने राज्य सरकार द्वारा इस मामले को संभालने के तरीके पर निराशा जताई और कहा कि इन घटनाक्रमों से उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार के इस कदम से मुझे दुख हुआ है। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मैं दुखी हूं। मैं 46 साल से सदन में हूं और अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। मैं टकराव की स्थिति नहीं चाहता था।"

होरट्टी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ अपने इस्तीफे के समय के बारे में चर्चा की थी और इस मामले पर उनके बीच सहमति बनी थी।

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के साथ मेरी चर्चा यह हुई थी कि 13 अगस्त को हम शोक प्रस्ताव पूरे करेंगे और 14 अगस्त को वाइस चेयरमैन का चुनाव होगा। मैंने कहा था कि उस दिन मुझे अपना आभार व्यक्त करने का मौका मिलेगा। मैंने उनसे कहा था कि उस दिन आभार व्यक्त करने के बाद मैं अपना इस्तीफा सौंप दूंगा। मैंने इस बारे में घोषणा भी की थी।"

होरट्टी की ये बातें लेजिस्लेटिव काउंसिल के चेयरमैन पद से उनके इस्तीफे को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें उम्मीद थी कि पद छोड़ने से पहले वे कार्यवाही पूरी करेंगे और औपचारिक रूप से सदन से विदा लेंगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उसी दिन इस्तीफे पर हस्ताक्षर करने का जोर दिया था, जिससे उनके पास कोई खास विकल्प नहीं बचा था।

कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक विधायक रहे होरट्टी ने कहा कि वह टकराव से बचना चाहते थे और इसलिए, इस्तीफे को जिस तरह से संभाला गया, उससे नाखुश होने के बावजूद उन्होंने इस मांग को मान लिया।

कर्नाटक विधान परिषद के चेयरमैन पद को लेकर चल रही राजनीति के बीच बसवराज होरट्टी ने शुक्रवार को राज्य विधानमंडल के उच्च सदन के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।

इस्तीफे का पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय ने जारी किया। यह घटनाक्रम तब हुआ, जब होरट्टी ने सुबह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की और उसके बाद दोपहर में चेयरमैन के कार्यालय में एक और बैठक हुई।

विधान परिषद के डिप्टी चेयरमैन को लिखे अपने तीन लाइन के इस्तीफा पत्र में होरट्टी ने कहा कि वह अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहे हैं।

विधान परिषद की सचिव ने तुरंत एक नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि होरट्टी के इस्तीफे के बाद चेयरमैन का पद खाली हो गया है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी