बेंगलुरु, 22 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक कैबिनेट के जल्द होने वाले विस्तार की चर्चाओं के बीच सोमवार को मंत्री पद पाने के लिए लॉबिंग तेज हो गई।
मुस्लिम धार्मिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की और उनसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और एमएलसी सलीम अहमद को कैबिनेट में शामिल करने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने मुस्लिम समुदाय के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की भी मांग की और कहा कि कम से कम तीन से पांच मंत्री पद मुस्लिम नेताओं को दिए जाएं।
फिलहाल, कैबिनेट में 13 पद भरे जा चुके हैं, जबकि बाकी 20 खाली पदों पर आने वाले दिनों में फैसला होने की उम्मीद है।
ऑल कर्नाटक सुन्नी मशायख काउंसिल के संयोजक सैयद ताजुद्दीन खादरी ने पत्रकारों को बताया कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र से किसी भी मुस्लिम नेता को लगभग दो दशकों से कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। उन्होंने कहा, "इस पृष्ठभूमि में, हमने सलीम अहमद के लिए मंत्री पद की मांग की है। वे तीन बार एमएलसी रहे हैं, लगभग 50 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं और उन्होंने पार्टी और समाज के लिए सराहनीय काम किया है।"
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को एक ज्ञापन सौंपा और इसी मांग को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी मुलाकात की।
जब उनसे पूछा गया कि मुस्लिम समुदाय कितने कैबिनेट पदों की मांग कर रहा है, तो खादरी ने कहा कि यह फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, हालांकि उन्हें तीन पदों की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "यह पार्टी आलाकमान को तय करना है। वे जानते हैं कि किसने पार्टी के लिए काम किया है और कौन इस पर विचार किए जाने का हकदार है।"
प्रतिनिधिमंडल के एक अन्य सदस्य, विजयपुरा के सैयद हैदर पाशा खादरी ने कहा कि समूह ने सबसे पहले सिद्धारमैया से मुलाकात की ताकि मुसलमानों और अन्य वंचित समुदायों के कल्याण में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि सलीम अहमद उत्तरी कर्नाटक में सूफी संतों को समर्पित कई बड़े कार्यक्रमों की रीढ़ रहे हैं, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव और बसवन्ना की शिक्षाओं को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा, "हम प्यार और सद्भाव का संदेश फैला रहे हैं। विभिन्न मठों के धार्मिक नेताओं और लाखों लोगों ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया है। सलीम अहमद ने इन प्रयासों को बहुत समर्थन दिया है। इसी संदर्भ में हमने मुख्यमंत्री से उन्हें कैबिनेट में शामिल करने का अनुरोध किया है।"
खादरी ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय एसएम कृष्णा के कार्यकाल में कैबिनेट में पांच मुस्लिम नेताओं को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा, "उस समय, डीके शिवकुमार को एसएम कृष्णा का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था और प्रशासन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।"
प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद से भी मुलाकात की और सलीम अहमद व अन्य मुस्लिम नेताओं को मंत्री पद देने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजयानंद कशप्पनवर ने भी कैबिनेट में जगह पाने का दावा पेश किया और पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया कि मंत्रियों की नियुक्ति की दूसरी सूची में कम से कम उनके नाम पर विचार किया जाए। उन्होंने बेंगलुरु में मुख्यमंत्री शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात की और कैबिनेट विस्तार में जगह पाने की अपनी इच्छा जताई।
दूसरी ओर, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा और परिवहन व मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी पार्टी आलाकमान के दखल के बाद अपने मतभेद सुलझाते हुए दिख रहे हैं। इन्होंने कथित तौर पर विभागों के बंटवारे को लेकर बगावत का झंडा बुलंद किया था।
असंतोष के शांत होने के साथ ही, मुख्यमंत्री शिवकुमार कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसे उनके नेतृत्व के लिए एक और बड़ी अग्निपरीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
--आईएएनएस
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