केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम के 20 भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ लेने का दिया निर्देश

केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम के 20 भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ लेने का दिया निर्देश

कोच्चि, 24 जून (आईएएनएस)। केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश उस राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद के फिर से सामने आने के बाद आया है, जिसमें उनके पदभार ग्रहण करने के बाद ली गई शपथ की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। अदालत के इस निर्णय से में लंबे समय से चल रहा यह विवाद फिर से चर्चा में आ गया है।

यह विवाद इस साल जनवरी से जुड़ा है, जब केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले में पार्षदों को नोटिस जारी किए थे। यह याचिका सीपीआई(एम) के पार्षद एस. पी. दीपक ने दायर की थी।

याचिका में भाजपा के पार्षदों द्वारा ली गई शपथ की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कई पार्षदों ने शपथ लेते समय निर्धारित कानूनी प्रारूप का पालन करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं के नाम लिए।

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि वैधानिक प्रारूप के अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधियों को या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लेनी होती है या फिर “गंभीर प्रतिज्ञान” करना होता है।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि जब कानून में शपथ का एक निश्चित प्रारूप निर्धारित है, तो उसे कई देवी-देवताओं के नाम पर कैसे लिया जा सकता है।

इसी याचिका पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को 20 पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता दीपक ने कहा कि अदालत का यह आदेश उनके इस तर्क की पुष्टि करता है कि शपथ से जुड़ी प्रक्रियाओं और मानकों का उल्लंघन हुआ था। उनके अनुसार, कुछ पार्षदों ने निर्धारित शब्दों का पालन करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं के नाम लेकर शपथ ली थी।

अपनी याचिका में दीपक ने शपथों को रद्द करने की भी मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि कई देवी-देवताओं के नाम पर शपथ लेना कानूनी रूप से अमान्य है।

उन्होंने पहले यह भी मांग की थी कि मामले के अंतिम निर्णय तक पार्षदों को नगर निगम की बैठकों में भाग लेने और मानदेय लेने से रोका जाए। हालांकि अदालत ने यह अंतरिम अनुरोध खारिज कर दिया और उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी, साथ ही स्पष्ट किया कि उनकी शपथ की वैधता अंतिम फैसले पर निर्भर रहेगी।

गौरतलब है कि भाजपा ने पहली बार राज्य के इतिहास में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जीत दर्ज की थी, जिसमें उसने चार दशकों से शासन कर रही सीपीआई(एम) को सत्ता से बाहर कर दिया था।

--आईएएनएस

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