कोलकाता, 24 जून (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की सिंगल-जज बेंच ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर तेजी से सुनवाई की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगी थी।
मंगलवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच के सामने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत मांगने वाली एक याचिका दायर की।
विदेश यात्रा के लिए कोर्ट की इजाजत मांगने वाली याचिका के साथ-साथ, मामले की तेजी से सुनवाई (फास्ट-ट्रैक हियरिंग) के लिए भी एक अर्जी दी गई थी।
हालांकि, बुधवार को जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने साफ तौर पर कहा कि तेजी से सुनवाई की इजाजत देने का कोई कारण नहीं है और यह भी कहा कि मामले की सुनवाई सामान्य प्रक्रिया के तहत होगी।
हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट की एक और सिंगल-जज बेंच के आदेश के बाद, पश्चिम बंगाल पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने एमएलए के हस्ताक्षर मेल न खाने के मामले की चल रही जांच के सिलसिले में अभिषेक बनर्जी से दो बार पूछताछ की थी। यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ सीटों पर नियुक्तियों से जुड़े एक अहम प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों से संबंधित है।
तब, जस्टिस कौशिक चंदा की सिंगल-जज बेंच ने अभिषेक बनर्जी को पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा भी दी थी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ, उनमें से एक शर्त यह थी कि वे कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते।
इसलिए, उस पाबंदी के बीच, बनर्जी ने मंगलवार को जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच के सामने इलाज के लिए विदेश यात्रा की इजाजत और मामले की तेजी से सुनवाई की मांग वाली याचिका दायर की।
अब, हालांकि विदेश यात्रा की इजाजत मांगने वाली मुख्य याचिका स्वीकार कर ली गई है। लेकिन तेजी से सुनवाई की अर्जी खारिज कर दी गई है।
अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में पार्टी के एक कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उस दुर्घटना में उनकी आंख में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने पहले देश के कई अस्पतालों में इलाज कराया और बाद में विदेश में इलाज करवाया।
--आईएएनएस
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