कोलकाता, 16 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रथम पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है।
यह शिकायत कोलकाता नगर सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष 10 जुलाई 2026 को बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और अन्य से संबंधित धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में दायर की गई थी। इससे पहले, शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 14 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया था। वर्तमान में, शांतनु सिन्हा बिस्वास न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस/कोलकाता पुलिस द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू और अन्य के खिलाफ जांच शुरू की। इन पर दंगा, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन में संलिप्तता का आरोप है। बिस्वजीत पोद्दर उर्फ सोना पप्पू सहित आरोपी पश्चिम बंगाल राज्य में संगठित आपराधिक गिरोह की गतिविधियों में शामिल थे और गिरोह के संचालन के माध्यम से अवैध रूप से भारी मात्रा में धन जुटाते थे।
2002 के पीएमएलए के तहत हुई जांच में पता चला कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने जय एस. कामदार को एक बेहद प्रभावशाली बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल किया, जिसने उनकी ओर से तबादलों और नियुक्तियों के प्रस्तावों को हासिल करने में मदद की और पुलिस व्यवस्था में अपने जुड़ाव के कारण भारी दबदबा बनाए रखा। शांतनु सिन्हा बिस्वास ने पुलिस जांचों में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया और इस प्रकार कानून प्रवर्तन मामलों में अपना प्रभाव डाला। पीएमएलए के तहत हुई जांच में यह भी स्थापित हुआ कि शांतनु सिन्हा बिस्वास पुलिस मामलों में अवैध सहायता प्रदान करने के बदले में जय कामदार और उनके परिवार से महंगे उपहार प्राप्त करके खुद को और अपने परिवार के सदस्यों को समृद्ध कर रहे थे, जिनमें एफआईआर दर्ज करना भी शामिल था।
आगे की जांच में पता चला कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने मुर्शिदाबाद के कंडी में स्थित संपत्ति के महंगे निर्माण और नवीनीकरण का काम करवाया था, जिसके लिए उन्होंने अपराध से प्राप्त धन का इस्तेमाल किया था। ईडी की जांच में कोलकाता और उसके आसपास स्थित कुछ आवासीय संपत्तियां भी सामने आईं, जो कुछ व्यक्तियों या कंपनियों के नाम पर अधिग्रहित की गई थीं, जिनका वास्तविक स्वामित्व शांतनु सिन्हा बिस्वास और उनके परिवार के सदस्यों के पास है। पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला है कि पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास ने अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 2.89 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ प्राप्त किया है।
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