कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम मोदी के कार्यकाल को सराहा, 'जबरदस्त वक्ता' भी बताया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम मोदी के कार्यकाल को सराहा, 'जबरदस्त वक्ता' भी बताया

नई दिल्ली, 19 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की। पीएम मोदी हाल ही में भारत में सरकार के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बने हैं।

आईएएनएस से ​​बातचीत के दौरान थरूर ने पीएम मोदी को 'जबरदस्त वक्ता' बताया, जिनकी सोच बहुत साफ और स्पष्ट है। इस दौरान, उन्होंने सांप्रदायिक बंटवारे और संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने को लेकर चिंता भी जताई।

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हम सभी मानते हैं कि उनमें बहुत ज्यादा उत्साह और ऊर्जा है, उनकी एक सोच है। आप उस सोच से सहमत हों या न हों, वे अपनी बात को बहुत अच्छे से रखते हैं। वे एक जबरदस्त वक्ता हैं, शायद हिंदी में इस देश ने जितने भी बेहतरीन वक्ता देखे हैं, उनमें से एक वे भी हैं।

उन्होंने कहा कि वे खासतौर पर उन लोगों तक पहुंचते हैं, जो वह भाषा बोलते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी मौजूदगी बहुत प्रभावशाली है और इसमें कोई शक नहीं कि वे भारतीय जीवन, समाज और राजनीति के कई पहलुओं पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं।

थरूर ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था और खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, निश्चित रूप से पीएम मोदी की उपलब्धियों में से एक है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसमें अभी भी सुधार की गुंजाइश है।

उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में कुछ नकारात्मक बातें भी देखने को मिली हैं और सिर्फ सकारात्मक पहलुओं पर ही ध्यान नहीं दिया जा सकता।

उन्होंने कहा कि हमें देश में बढ़ती फूट, सांप्रदायिक बंटवारे और सत्ताधारी पार्टी व उनके समर्थकों द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे ऐसे राजनीतिक बयानों की चिंता है, जिनसे दुर्भाग्यवश आबादी का एक बड़ा हिस्सा अलग-थलग पड़ गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के दक्षिणी हिस्से में लोग संघवाद के अस्तित्व को लेकर चिंतित हैं।

थरूर ने कहा कि पिछले 12 सालों में हमारे लोकतंत्र की स्वतंत्र और स्वायत्त संस्थाओं को जिस तरह से खोखला किया गया है, उसे लेकर कई तरह की वास्तविक चिंताएं हैं।

उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि उन्होंने (पीएम मोदी ने) कई काम सही किए हैं, लेकिन इस दौरान ऐसी कई चीजें भी हुई हैं, जो भारत के लिए उतनी अच्छी नहीं हैं।

--आईएएनएस

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