कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था : पीएम मोदी

कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था : पीएम मोदी

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के 12 साल पूरे होने पर एनडीए कॉन्केल्व को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ग्रोथ रेट में न सुशासन था, न नीति, न नीयत और ना निर्णय। पहली बार अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार आई, तब जाकर हमें एक झलक दिखी कि विकास में गति कैसे आती है। लेकिन, दुर्भाग्य से 2004 में देश फिर से अस्थिरता के बवंडर में और कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया।

उन्होंने कहा कि एनडीए के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है। कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था। देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, 'हिंदू ग्रोथ रेट' यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया। जबकि, असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था, कांग्रेस ग्रोथ रेट। इस कुशासन काल को अधिक सटीक रूप से 'कांग्रेस विकास दर' कहा जाना चाहिए था, जो प्रभावी शासन, स्पष्ट नीति, वास्तविक इरादे और निर्णायक कार्रवाई के अभाव से चिह्नित था।

उन्होंने कहा कि सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'एनडीए ग्रोथ रेट' का अंतर है। एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी। आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है। एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी। आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा। इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया के बड़े-बड़े देशों की अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है, तब भी 2025-26 में भारत ने 7.7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल की है, और पिछला क्वार्टर तो, जो 31 मार्च को खत्म हुआ है, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही है। ये सफलता इतनी आसान नहीं है, हम 'फ्रेजाइल फाइव' के कटघरे से बाहर निकलकर आज दुनिया की तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्था लोगों को इंतजार करने पर मजबूर करती थी, जिससे प्रगति में देरी होती थी। आज की व्यवस्था परिणाम देती है, काम रुकने के बजाय तेजी से और बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए, 2014 से 2026 तक की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। यह भारत द्वारा अपनी पूरी क्षमता को साकार करने और आगे बढ़ने की कहानी है। यह एक ऐसे राष्ट्र की कहानी है जिसने उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं और नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए लगन से काम किया है।

--आईएएनएस

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