बेंगलुरु, 18 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने शनिवार को राज्य में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार से जुड़ी गतिविधियों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के साथ-साथ, सूखे की मौजूदा स्थिति समेत शासन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम है।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि कैबिनेट विस्तार के मुद्दे पर मीडिया और विपक्ष ने विरोधाभासी रुख अपनाया है।
उन्होंने कहा, "एक तरफ तो मीडिया कहती है कि सरकार बिना पूरी कैबिनेट के काम कर रही है, और दूसरी तरफ, जब विस्तार किया जा रहा है तो कहती है कि सत्ताधारी कांग्रेस राजनीतिक गतिविधियों में लगी है जबकि राज्य सूखे का सामना कर रहा है।"
यह जोर देते हुए कि कांग्रेस सरकार अपनी जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है, उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन पूरे कर्नाटक में सूखे जैसे हालात पर बारीकी से नजर रख रहा है।
उन्होंने कहा, "लोगों ने हमें जिम्मेदारी सौंपी है, और हम वही करेंगे जो जरूरी है। मुख्यमंत्री और मैंने बेलागवी डिवीजन के आठ जिलों और कलबुर्गी डिवीजन के आठ जिलों की स्थिति के बारे में पहले ही बैठकें कर ली हैं। मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने गृह जिले तुमकुरु के साथ-साथ चित्रदुर्ग में भी स्थिति की समीक्षा की है।"
परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति का आकलन करने और जरूरी निर्देश जारी करने के लिए रविवार को सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस करेगी।
उन्होंने कहा, "सरकार इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या करने की जरूरत है। हम समीक्षा के लिए सभी डिप्टी कमिश्नरों की बैठक बुला रहे हैं और उन्हें उचित निर्देश देंगे।"
पानी की कमी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने हर जिले के लिए 5 करोड़ रुपए जारी किए हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 324 करोड़ रुपए होते हैं, और यह खास तौर पर पीने के पानी की जरूरतों के लिए है।
उन्होंने कहा, "डिप्टी कमिश्नरों के पास उनके पीडी खातों में 600 करोड़ से 700 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं, और उन्हें स्थानीय जरूरतों के आधार पर फंड का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।"
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और डिप्टी कमिश्नर स्थिति पर बारीकी से नजर रखेंगे।
परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर सूखा घोषित करने के नियमों में ढील देने और केंद्रीय सहायता की मांग की है।
उन्होंने कहा, "विपक्ष यह सुनिश्चित करे कि केंद्र से फंड जारी हो। हम खाली नहीं बैठे हैं; हम जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं।"
--आईएएनएस
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