रांची, 17 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद इस परीक्षा के जरिए चयनित होकर विभिन्न पदों पर कार्यरत अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई। फैसले की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी सोमवार को झारखंड मंत्रालय स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुट गए और सरकार के निर्णय के खिलाफ हंगामा किया।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए दो हजार से अधिक अभ्यर्थियों का विभिन्न सरकारी पदों पर चयन हुआ है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थी करीब एक साल से अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद अब इन नियुक्तियों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपने भविष्य को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र मिला और वे अपने-अपने पदों पर योगदान दे चुके हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा को रद्द किए जाने से उनका रोजगार और भविष्य प्रभावित होगा।
अभ्यर्थियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन उसका खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए, जिन्होंने चयन प्रक्रिया के बाद नौकरी हासिल की है। सरकार की ओर से जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का फैसला जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि एसआईटी और सीआईडी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने वर्ष 2014 से अब तक की जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच कराने की भी घोषणा की है। सरकार के फैसले के बाद एक ही परीक्षा को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनकारी छात्र इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहे हैं, जबकि परीक्षा के जरिए नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। अब सरकार के सामने आंदोलनकारी छात्रों की मांग पूरी करने के साथ-साथ जेएसएससी-सीजीएल के जरिए नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर उठे सवालों का समाधान निकालने की चुनौती भी है।
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