रांची, 21 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार, याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों को अपना-अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय करते हुए कहा कि इस मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई की जाएगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रेरणा झुनझुनवाला ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्ष अपना लिखित जवाब दाखिल करें। उन्होंने कहा कि अदालत ने माना है कि इस मामले से सफल और असफल दोनों तरह के अभ्यर्थियों के हित जुड़े हैं और यह बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाला मामला है।
उन्होंने कहा कि अदालत ने जिस अधिसूचना के जरिए परीक्षा रद्द की गई है, उसी पर रोक लगाई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रद्द की गई परीक्षा के आधार पर जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, वे फिलहाल विधिसम्मत तरीके से अपना कार्य करते रहेंगे और उन्हें हटाया नहीं जाएगा।
प्रेरणा झुनझुनवाला ने कहा कि वह इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पक्ष रख रही थीं और कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की है।
वहीं, इंटरवीनर की ओर से पेश अधिवक्ता कुमार हर्ष ने आईएएनएस से कहा कि उन्होंने मेरिटोरियस अभ्यर्थियों की ओर से इंटरवीनर आवेदन दायर किया है। उनके अनुसार, 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े मामले में पहले दी गई अंतरिम राहत का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में भी रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
कुमार हर्ष ने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर परीक्षाएं रद्द की गई हैं, उनसे जुड़े जांच एजेंसियों के दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने लाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उनका आरोप है कि राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं की दलीलों का विरोध करने से ज्यादा इंटरवीनर आवेदन का विरोध कर रही है।
उन्होंने कहा कि इंटरवीनर की ओर से अदालत से आग्रह किया गया कि जांच एजेंसियों द्वारा अब तक सामने आए सभी तथ्यों और दस्तावेजों को राज्य सरकार अपने हलफनामे के साथ रिकॉर्ड पर लाए। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया और कहा गया कि अदालत उन्हें ऐसा निर्देश नहीं दे सकती।
कुमार हर्ष ने कहा कि अदालत का फैसला साक्ष्यों के आधार पर ही होगा और ऐसे साक्ष्य उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि इंटरवीनर प्रभावित पक्ष हैं, इसलिए उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है और मामले की सच्चाई तभी सामने आएगी जब जांच से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को करेगा, जहां राज्य सरकार सहित सभी पक्षों के जवाब और हलफनामों पर विचार किया जाएगा।
--आईएएनएस
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