रांची, 10 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में करीब दो दशक से सक्रिय 15 लाख रुपये के इनामी माओवादी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन और उसकी 10 लाख रुपये की इनामी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा ने बंगाल में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।
इनके अलावा इनामी महिला कैडर बुलू उर्फ गौरी ने भी सरेंडर किया है। इन्होंने पुलिस को एके-47 सहित कई हथियार भी सौंपे हैं।
बंगाल पुलिस की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर इन तीनों के सरेंडर का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन झारखंड पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड के झुंझका गांव का रहने वाला रामप्रसाद मार्डी पिछले करीब 20 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह सारंडा, दलमा, अयोध्या हिल्स और जंगलमहल के इलाकों में माओवादी गतिविधियों में लंबे समय से शामिल रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रामप्रसाद मार्डी उर्फ महादेव उर्फ सचिन उर्फ सुनील, भाकपा माओवादी की रिजनल कमेटी का सदस्य है और उसके खिलाफ झारखंड में कुल 44 मामले दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर में वह जमशेदपुर के पूर्व सांसद सुनील महतो की हत्या सहित कई गंभीर माओवादी मामलों में प्रमुख आरोपी रहा है। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स के कैंप पर हुए हमले और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर किए गए बारूदी सुरंग विस्फोटों के मामलों में भी उसकी भूमिका की जांच हुई है।
इसी तरह मीता उर्फ नयनतारा और बुलू उर्फ गौरी के खिलाफ भी दर्जनों मामले दर्ज हैं। पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों ने झारखंड-बंगाल सीमा के जंगलों में माओवादी कैडर के खिलाफ अभियान तेज कर दिया था।
पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने सचिन के खिलाफ इनामी पोस्टर भी लगाए थे। सारंडा और कोल्हान के जंगलों में केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस के लगातार अभियान से माओवादी दस्ते दबाव में थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, संगठन के भीतर रसद और सुरक्षित ठिकानों की कमी ने भी उसके सामने मुश्किलें बढ़ाई थीं।
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