चाईबासा, 7 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम उर्फ डांगिल ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ दो महिला माओवादी कैडरों ने भी नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है। महिला कैडरों की पहचान कोदो मुनी कोड़ा उर्फ पद्मनी और पिंकी के रूप में हुई है।
पद्मनी पर एक लाख रुपये का इनाम था। वह टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ा टोला, बंगलासाई की रहने वाली है। पिंकी गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचागोड़ा की निवासी है। सालुका कायम कोल्हान में माओवादी संगठन के प्रमुख चेहरों में माना जाता था। पुलिस रिकॉर्ड में उसके कई नाम दर्ज हैं। इनमें सालुका, डांगिल, मारू और भुवनेश्वर शामिल हैं। वह संगठन की साउथ जोन सेंट्रल कमेटी से जुड़ा था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कोल्हान में माओवादी गतिविधियों को बनाए रखने में उसकी अहम भूमिका थी। सालुका सोनुवा थाना क्षेत्र के कुदाबुरू कायमसाई गांव का रहने वाला है। वह लंबे समय से पुलिस की वांछित सूची में था। उसका आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है, जब कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीमें माओवादी ठिकानों की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं। पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों ने संगठन के खिलाफ कई कार्रवाई की हैं।
पुलिस के अनुसार, जंगलों में लगातार चल रहे अभियानों से माओवादी संगठन पर दबाव बढ़ा है। उसके लिए अपने ठिकानों को सुरक्षित रखना और कैडरों की गतिविधियां जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी ओर, सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता खोला है। सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास और निर्धारित सुविधाएं दी जाएंगी।