रांची, 14 जून (आईएएनएस)। झारखंड में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अब तक 2.64 करोड़ मतदाताओं में से 2.11 करोड़ यानी करीब 80 प्रतिशत मतदाता अपना या अपने माता-पिता का मैपिंग कार्य पूरा कर चुके हैं। इस बीच दस्तावेज जमा करने को लेकर फैल रही भ्रम की स्थिति पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा चरण में अधिकांश मतदाताओं को कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने रविवार को कहा कि गणना (इन्यूमरेशन) चरण के दौरान मतदाताओं से किसी प्रकार का दस्तावेज एकत्र नहीं किया जाएगा। मतदाताओं को केवल भरा हुआ और हस्ताक्षरित इन्यूमरेशन फॉर्म तथा एक हालिया रंगीन फोटो बीएलओ को उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं ने अपने या अपने माता-पिता के नाम का मिलान (मैपिंग) पहले की मतदाता सूची से कर लिया है, उनका नाम बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल रहेगा। जिन मामलों में कुछ त्रुटियां या विसंगतियां हैं, उनमें भी संबंधित निर्वाचन अधिकारी और बीएलओ उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुधार का प्रयास करेंगे।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि दस्तावेज केवल उन्हीं चुनिंदा मामलों में मांगे जाएंगे, जहां सत्यापन के दौरान कोई आपत्ति या संदेह सामने आएगा। ऐसे मतदाताओं को 5 अगस्त से शुरू होने वाली नोटिस एवं सत्यापन अवधि के दौरान अलग से सूचना दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि बीएलओ घर-घर जाकर पहले से तैयार फॉर्म वितरित करेंगे और भरे हुए फॉर्म वापस लेकर उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करेंगे। इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ही शुरुआती चरण में दस्तावेज जमा करने की बाध्यता नहीं रखी गई है। नए मतदाताओं के लिए अलग व्यवस्था है। जो नागरिक 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे और पहली बार मतदाता बनना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित घोषणा-पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा।
निर्वाचन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे दस्तावेज जमा करने को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक निर्देशों के आधार पर ही प्रक्रिया में भाग लें।