जयपुर, 10 जून (आईएएनएस)। जयपुर के खोह नागोरियन इलाके में पटाखे बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री में लगी भीषण आग में एक बच्चे समेत आठ लोगों की मौत के एक दिन बाद बुधवार को खोह नागोरियन पुलिस स्टेशन के दो कर्मचारियों, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) अमर सिंह और हेड कॉन्स्टेबल पप्पू राम को सस्पेंड कर दिया गया।
मंगलवार रात से ही पुलिस की टीमें खोह नागोरियन और आस-पास के इलाकों में छापेमारी कर रही हैं।
इस ऑपरेशन के दौरान तीन अलग-अलग फैक्ट्रियों और गोदामों से भारी मात्रा में गैर-कानूनी तरीके से रखा गया बारूद बरामद किया गया।
अधिकारियों ने अब तक पटाखे बनाने और उन्हें स्टोर करने से जुड़ी पांच फैक्ट्रियों और गोदामों को सील कर दिया है।
आयशा कॉलोनी के कई घरों में भी छापेमारी की गई, जहां कथित तौर पर पटाखे बनाए जा रहे थे।
हालांकि, बुधवार दोपहर तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।
इस हादसे के बाद प्रशासन की लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता के आरोप लगे हैं, जिसके चलते इलाके में चल रही गैर-कानूनी पटाखा बनाने वाली यूनिट्स के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की गई है।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे आग लगी, जहां कथित तौर पर पटाखे बनाने की एक गैर-कानूनी यूनिट चल रही थी।
यह प्रॉपर्टी याकूब की है, जो नजीर खान का बेटा है और खोह नागोरियन इलाके में 'रक्षा की ढाणी' का रहने वाला है।
पुलिस ने बताया कि घर का मालिक याकूब और कथित फैक्ट्री ऑपरेटर फिरोज (जो दिल्ली का रहने वाला है) दोनों ही घटना के बाद से फरार हैं।
इस आग में आठ लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक बच्चा और दो भाई भी शामिल थे।
यह हाल के वर्षों में जयपुर में हुए सबसे घातक औद्योगिक हादसों में से एक है।
जावेद विहार में छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक ही जगह पर बने तीन गोदामों को सील कर दिया।
जांचकर्ताओं को दो मशीनें मिलीं जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर पटाखे बनाने में किया जाता था।
अधिकारियों ने बताया कि इन गोदामों का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री बनाने और स्टोर करने, दोनों कामों के लिए किया जा रहा था।
आयशा कॉलोनी में जिस गोदाम में जानलेवा हादसा हुआ, उसके अलावा अधिकारियों ने जावेद विहार में भी आरोपी से जुड़े तीन गोदामों को सील किया।
खबरों के मुताबिक, ये जगहें याकूब और उसके भतीजे कय्यूम की हैं, दोनों को ही इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया है।
इस ताजा कार्रवाई के बाद, सील की गई फैक्ट्रियों और गोदामों की कुल संख्या पांच हो गई है।
शुरुआती जांच से पता चला है कि फैक्ट्री में कोल्ड फायर पटाखे बनाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर शादियों और जश्न के मौकों पर होता है।
अधिकारियों ने पाया कि घर को एक दीवार से दो हिस्सों में बांटा गया था, ताकि लोगों की नजर से बचाकर पटाखे बनाने का काम किया जा सके।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर बार-बार चिंता जताए जाने के बावजूद घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में इतने बड़े पैमाने पर पटाखे बनाने वाली यूनिट कैसे चल रही थी।
--आईएएनएस
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