अयोध्या, 23 जून (आईएएनएस)। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी।
परमहंस आचार्य ने कहा कि बोर्ड को भारत के विभाजन के इतिहास को ध्यान में रखकर अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। जब भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान तथा बांग्लादेश बने, तब वहां हिंदुओं की संख्या कितनी थी और आज कितनी बची है, इसका अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हिंदुओं की संख्या और मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या वृद्धि के आंकड़ों को भी देखा जाना चाहिए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि उनकी दृष्टि में कुछ लोगों की जिहादी मानसिकता के कारण ही देश में हिंदू राष्ट्र की मांग उठ रही है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या लगातार कम हुई है और वहां हिंदू समुदाय विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत में मुस्लिम समुदाय को विभिन्न संवैधानिक और सामाजिक लाभ प्राप्त हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा और उससे जुड़े लाभ मिलने के बावजूद कुछ संगठनों द्वारा यह आरोप लगाया जाता है कि उनके साथ अत्याचार हो रहा है। परमहंस आचार्य ने कहा कि इसी प्रकार की बयानबाजी और 'जहरीले बोल' हिंदू राष्ट्र की मांग को बल देते हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसी प्रकार की परिस्थितियों के कारण भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग और अधिक मजबूत हो सकती है। उनका कहना था कि यदि सभी सुविधाएं और सम्मान मिलने के बावजूद असंतोष और आरोपों का सिलसिला जारी रहता है, तो हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को समर्थन मिलता रहेगा।
वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े कथित जमीन खरीद विवाद पर टिप्पणी करते हुए परमहंस आचार्य ने कहा कि वह एक अच्छे मुख्यमंत्री हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे अपनी ईमानदार छवि बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए कि लोग यह कहें कि भारतीय जनता पार्टी के किसी मुख्यमंत्री ने गलत कार्य किया है। यदि मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप सही हैं, तो इससे गलत संदेश जाएगा। अगर ऐसा कुछ है तो मुख्यमंत्री को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
--आईएएनएस
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