अमृतसर, 3 अगस्त (आईएएनएस)। श्रावण मास के पहले सोमवार के दिन 'श्री दुर्गियाना मंदिर' में भोलेनाथ का दिव्य श्रृंगार किया गया। इस मौके पर भक्तों की भारी संख्या में भीड़ देखने को मिली। मंदिर के मेघा श्याम लाल शास्त्री ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि हर सोमवार भोलेनाथ का भव्य श्रृंगार किया जाता है।
पुजारी मेघा श्याम लालशास्त्री ने कहा, "श्री दुर्गियाना मंदिर बहुत ही प्राचीन है और सावन के पवित्र महीने में हर सोमवार को भगवान शिव का फूलों और अलग-अलग सजावटी चीजों से खास श्रृंगार किया जाता है। बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करने के लिए मंदिर आते हैं।"
उन्होंने बताया कि सावन माह के सोमवार को कई भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं और भगवान का रुद्राभिषेक करते हैं। यहां पर सावन के महीने में रोजाना रुद्राभिषेक किया जाता है। मंदिर में आए हुए श्रद्धालु भगवान के रुद्राभिषेक में शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा, "इस मंदिर के शिवलिंग का स्फटिक नीले रंग का होता है लेकिन खास बात ये है कि दिन में शिवलिंग का रंग बदल जाता है। कभी बर्फ, तो कभी नीले रंग और पारदर्शिता यानी कि शीशे के समान हो जाता है कि आप अपना चेहरा देख सकते हैं। ये भी महादेव की लीला है। यहां पर भगवान का भव्य श्रृंगार होता है और हर सोमवार भगवान का विशेष श्रृंगार होता है।"
उन्होंने बताया कि पहले के समय में अमरनाथ यात्रा की छड़ी यहीं से जाया करती थी। उन्होंने कहा, "अब श्रीनगर से जाती है, उससे पहले जम्मू से जाया करती थी और उससे पहले यहां अमृतसर स्थित 'श्री दुर्गियाना मंदिर' से जाती थी। भोलेनाथ एकमात्र ऐसे भगवान हैं, जो बहुत आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं, उन्हें तो जल भी अर्पित कर दो, तो वे उससे भी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के चार सोमवार में व्रत किया जाता है और पांचवें में उद्यापन कर दिया जाता है। लोग अपनी आस्था के अनुसार व्रत करते हैं। कुछ लोग फलाहार रहते हैं, तो कुछ निर्जला रहते हैं। भोलेनाथ का ये व्रत हर किसी को शुरु करना चाहिए। यहां पर सावन के महीने में 24 घंटे लगातार रुद्राभिषेक होता है और 15 अगस्त को 24 घंटे होगा, जिन्हें रुद्राभिषेक करवाना हो या फिर शामिल होना हो, वे आ सकते हैं।