Indian Rock Python : जहर नहीं, ताकत है जिसकी पहचान, विशालकाय शरीर के दम पर लेता है शिकार की जान

भारतीय रॉक पाइथन: 25 फीट तक बढ़ने वाला विशाल सांप, जानिए खासियतें और खतरे
भारतीय रॉक पाइथन : जहर नहीं, ताकत है जिसकी पहचान, विशालकाय शरीर के दम पर लेता है शिकार की जान

नई दिल्ली: घने जंगलों में पाया जाने वाला विशालकाय अजगर, जिसकी त्वचा पर भूरे रंग की आकर्षक धारियां होती हैं, लंबाई में 25 फीट तक बढ़ सकता है। इसका शरीर अत्यंत मोटा, मजबूत और शक्तिशाली होता है। यहां बात भारतीय रॉक पाइथन की हो रही है, जिसे भारत का सबसे बड़ा बिना विष वाला सांप माना जाता है।

बिहार सरकार के वन और जंगल विभाग के अनुसार, भारतीय रॉक पाइथन में जहर नहीं होता, लेकिन इसकी मांसपेशियां ताकतवर होती हैं। यह शिकार को एक बार लपेट ले तो दम घुटने से मौत हो जाती है। पाइथन की आंखों के पास खास सेंसरी पिट्स होते हैं। ये पिट्स शिकार के शरीर की गर्मी को महसूस करते हैं, जिससे यह अंधेरे में भी आसानी से शिकार ढूंढ लेते हैं। यह ज्यादातर छोटे स्तनधारियों को अपना भोजन बनाता है।

यह सांप भारत में कई जगह पाया जाता है, जैसे उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पश्चिमी घाट, पूर्वी राज्यों जैसे बंगाल, ओडिशा, झारखंड, असम, मध्य भारत और यहां तक कि गुजरात के जंगलों और अंडमान-निकोबार में भी।

पाइथन दलदल, नदियों, झीलों, मैंग्रोव और घने जंगलों में रहते हैं। खास बात है कि ये पाइथन अच्छा तैराक होने के कारण पानी के किनारे ज्यादा रहता है। यह पेड़ों पर भी चढ़ जाता है। इसकी खासियत है उसका शिकार करने का तरीका। छोटे-मध्यम स्तनधारियों, पक्षियों, छिपकलियों से लेकर बड़े जानवर जैसे चिंकारा या चित्तीदार हिरण तक को यह जकड़ लेता है और फिर निगल जाता है।

गुजरात सरकार के जंगल विभाग के अनुसार, पाइथन शिकार को देखते ही तेजी से लपकता है, फिर उस पर अपने लंबे शरीर के कई लपेटे लगा देता है। ये शिकार का सांस रोककर दबाव बढ़ाता है, ऐसे में शिकार का दिल धड़कना बंद हो जाता है। उसके बाद मुंह को बहुत चौड़ा करके ये पाइथन शिकार को साबुत ही निगल लेता है। भारतीय रॉक पाइथन की औसत लंबाई 8-12 फीट होती है, लेकिन कुछ 15-25 फीट तक पहुंच जाते हैं। वहीं, वजन 52 किलो तक मिल सकता है।

इसके शरीर पर भूरे, स्लेटी या पीले-काले धारियां होती हैं, जो जंगल में छिपने में मदद करती हैं। पाइथन अब खतरे में है, आबादी में कमी आ रही है इस वजह से इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे संकट के करीब घोषित किया है। जंगल कटाई, खेती, शहरों का फैलाव, अवैध शिकार, सड़क हादसे और लोगों से टकराव इनकी कमी के मुख्य वजहों में शामिल हैं।

एक अध्ययन में देखा गया कि ट्रांसलोकेट (स्थानांतरित) किए गए पाइथन 13 किमी दूर छोड़े जाने पर भी अपने आवास पर वापस सकते हैं, उनमें कमाल का दिशा ज्ञान होता है! सर्दियों में ये कम सक्रिय रहते हैं। वहीं, गर्मियों में सुबह-शाम ज्यादा घूमते हैं।भारतीय रॉक पाइथन सिर्फ जंगल का हिस्सा नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने वाला है। यह चूहों, खरगोश जैसी प्रजातियों को भी कंट्रोल करते हैं।

--आईएएनएस

 

 

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