मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत के मामले में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए बड़े संस्थानों में कैंपस के माहौल और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही, उन्होंने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने के लिए प्रोफेसरों को नौकरी से निकाले जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत बेहद दुखद है और यह एक और याद दिलाती है कि इन बड़े संस्थानों को कैंपस के माहौल और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की जरूरत है। हालांकि विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने के लिए प्रोफेसरों को नौकरी से निकालना एक ऐसी समस्या का सिर्फ ऊपरी इलाज है, जिसके लिए असल में सर्जरी की जरूरत है।"
उन्होंने आगे लिखा, "साथ ही, उन प्रोफेसरों पर दोष मढ़ना जो परीक्षा के दौरान नकल की रिपोर्ट करने का अपना काम कर रहे थे और इसे जातिगत भेदभाव का मुद्दा बना देना, एक दुखद नतीजा है।"
बता दें कि आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की मौत के बाद कैंपस में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया था। छात्रों ने आईआईटी प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद संस्थान ने कार्रवाई करते हुए कुछ प्रोफेसरों को हटाने का फैसला लिया था, जिस पर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कितना काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रोफेसरों को निकालने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि इसके मूल कारणों को समझने और दूर करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जो प्रोफेसर अपना कर्तव्य निभा रहे थे, उन पर दोष मढ़ना और इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ना गलत दिशा में ले जाना है। मामले में अभी जांच जारी है।
--आईएएनएस
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