ईडी की बैंक फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई, 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त की

ईडी की बैंक फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई, 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त की

बेंगलुरु, 6 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 51.28 करोड़ रुपए (बाजार मूल्य लगभग 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक) की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई दीपक केबल (इंडिया) लिमिटेड (डीसीआईएल), इसके प्रबंध निदेशक के. वेंकटेश्वर राव, निदेशक सत्यवती बॉल और उनसे संबंधित संस्थाओं द्वारा बैंक धोखाधड़ी, ऋण निधि के गबन और हेराफेरी से संबंधित एक मामले में की गई है।

ईडी ने सीबीआई, बीएस एंड एफबी, बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। अनुसूचित अपराध आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का उपयोग और आपराधिक कदाचार से संबंधित हैं, जिसके परिणामस्वरूप कंसोर्टियम बैंकों को गलत तरीके से नुकसान हुआ है।

पीएमएलए के तहत जांच में पता चला कि मेसर्स डीसीआईएल और उसके प्रवर्तकों ने हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए स्टॉक विवरण और झूठे देनदार विवरण प्रस्तुत करके कंसोर्टियम बैंकों से धोखाधड़ी से विभिन्न ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं और उनका लाभ उठाया।

जांच में आगे यह भी स्थापित हुआ कि आरोपियों ने मेसर्स सूर्या ट्रांसमिशन लिमिटेड, मेसर्स आधुनिक पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड, मेसर्स दांडडेली फेरो प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स शरावती कंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड सहित संबंधित कंपनियों के एक नेटवर्क के माध्यम से बैंक ऋण निधि का गबन और हेराफेरी की। लिमिटेड, मेसर्स वेंकटेश इंडस्ट्रीज, मेसर्स मारुति इंजीनियरिंग वर्क्स, मेसर्स यूनिवर्सल ट्रांसमिशन लाइन प्रोडक्ट्स, मेसर्स केजीएन इलेक्ट्रिकल्सऔर अन्य संबंधित संस्थाओं को वास्तविक माल की आवाजाही के बिना काल्पनिक बिक्री और खरीद लेनदेन बनाकर।

ऋण की राशि को स्वीकृत उद्देश्यों से असंबंधित उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया गया, जिनमें संबंधित संस्थाओं के माध्यम से निजी इक्विटी निवेशकों से इक्विटी शेयरों की बायबैक और परिसंपत्तियों का अधिग्रहण शामिल है।

इससे पहले, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत कई परिसरों पर तलाशी ली, जिनका संबंध आरोपी व्यक्तियों और उनके सहयोगियों से था। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और रिकॉर्ड जब्त किए गए। इसके बाद, के. वेंकटेश्वर राव को 2 जून 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया और ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। जांच के दौरान पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत कई आरोपी व्यक्तियों, बैंक अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

पीएमएलए के तहत की गई जांच में यह भी पता चला कि अपराध की आय से सीधे तौर पर अर्जित संपत्तियां, साथ ही अभियुक्त व्यक्तियों, उनके परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं के नाम पर मौजूद समतुल्य मूल्य की संपत्तियां भी पहचानी गईं।

चूंकि अपराध की आय का एक बड़ा हिस्सा छिपाया गया था, डायवर्ट किया गया था या सीधे तौर पर पता नहीं लगाया जा सका था, इसलिए अपराध की आय की सुरक्षा और जब्ती की कार्रवाई में बाधा न डालने के लिए पीएमएलए के प्रावधानों के तहत समतुल्य मूल्य की संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है। आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

एमएस/