हैदराबाद, 21 अगस्त (आईएएनएस)। हैदराबाद में सड़क हादसे में एक युवती की मौत हुई थी। इस मामले में जनसेना सांसद लिंगमानेनी रमेश के बेटे को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे थे, इस बीच साइबराबाद पुलिस ने शुक्रवार को अपना पक्ष रखा। पुलिस ने कहा कि यह आरोप गलत और निराधार है कि किसी बाहरी दबाव या प्रभाव के कारण आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारी न करने का फैसला कानूनी प्रावधानों, मामले की परिस्थितियों और जांच के उस समय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया गया था।
साइबराबाद पुलिस ने गुरुवार को बताया था कि 21 वर्षीय लिंगमानेनी संजुश के खिलाफ कथित रूप से लापरवाही और तेज रफ्तार से कार चलाते हुए एक युवती की मौत का कारण बनने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
26 वर्षीय भारती मुखी, जो हैदराबाद के माधापुर स्थित आईटी कॉरिडोर में इनऑर्बिट मॉल के लाइफस्टाइल स्टोर में सेल्स एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत थीं, 16 अगस्त को सड़क पार करने के दौरान एक लग्जरी कार ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ऋतिराज ने बताया कि माधापुर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
डीसीपी के अनुसार, मामला दर्ज होने के तुरंत बाद दुर्घटना में शामिल वाहन चालक को हिरासत में लेकर शराब और नशीले पदार्थों की जांच के लिए प्रारंभिक परीक्षण किए गए। इन दोनों परीक्षणों की रिपोर्ट नकारात्मक आई।
इसके बाद चालक के रक्त के नमूने लेकर उन्हें वैज्ञानिक जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया।
पुलिस ने बताया कि हादसे में शामिल कार को जब्त कर लिया गया है और उसे मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) की जांच के लिए भेजा गया है। एमवीआई की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
डीसीपी ने कहा, "उस समय उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए बीएनएस की धारा 106(1) लगाई गई, जिसमें अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान है। चूंकि यह अपराध सात साल से कम सजा वाली श्रेणी में आता है, इसलिए जांच अधिकारी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35 और सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार गिरफ्तारी की आवश्यकता पर विचार करना था।"
उन्होंने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद ऐसी कोई परिस्थिति नहीं मिली, जिससे आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी जरूरी हो। इसलिए आरोपी को जांच में शामिल होने और सहयोग करने के लिए बीएनएसएस की धारा 35 के तहत नोटिस जारी किया गया।
डीसीपी ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप थी, जो सात साल तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी के संबंध में लागू होते हैं।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। एमवीआई रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद यदि आगे की जांच में गिरफ्तारी की आवश्यकता महसूस होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी







