हीटवेव से निपटने के लिए यूपी सरकार की तैयारी, स्कूलों के लिए 'हीट एक्शन प्लान' जारी

हीटवेव से निपटने के लिए यूपी सरकार की तैयारी, स्कूलों के लिए 'हीट एक्शन प्लान' जारी

लखनऊ, 28 जून (आईएएनएस)। भीषण गर्मी और बदलते मौसम की चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रों को गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए विशेष 'हीट एक्शन प्लान' तैयार किया है। इसके तहत शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि वे छात्रों को अत्यधिक गर्मी, थकावट और लू (हीटस्ट्रोक) से सुरक्षित रखने में मदद कर सकें।

बेसिक शिक्षा विभाग ने 'गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रति छात्रों को जागरूक बनाने के लिए शिक्षकों हेतु दिशा-निर्देश 2026' जारी किए हैं।

इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य शिक्षकों को आवश्यक जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, जिसमें हीटवेव से बचाव, लू और गर्मी से होने वाली थकावट के लक्षणों की पहचान, प्राथमिक उपचार और छात्रों की सुरक्षा के उपाय शामिल हैं।

स्कूलों को बच्चों, अभिभावकों और स्कूल समुदाय को जागरूक करने के लिए 'हीट एक्शन प्लान' लागू करने की सलाह दी गई है। इसके तहत ‘क्या करें और क्या न करें’ संबंधी पोस्टर लगाए जाएंगे, ताकि गर्मी का बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और स्कूल जीवन पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि हीटवेव के दौरान छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षक सुबह की प्रार्थना सभा, कक्षा शिक्षण, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और दैनिक स्कूल गतिविधियों के दौरान छात्रों को गर्मी से बचाव के उपायों की जानकारी देंगे।

हर स्कूल को अपना 'स्कूल हीट एक्शन प्लान' तैयार करना होगा और हीटवेव से संबंधित गतिविधियों के समन्वय के लिए 'हेल्थ नोडल टीचर' नियुक्त करना होगा।

शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। स्कूल परिसर में हीटवेव से बचाव के उपाय और आपातकालीन संपर्क नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे।

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक स्कूल में प्राथमिक उपचार किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, विशेष रूप से 108 एंबुलेंस सेवा, से संपर्क की व्यवस्था उपलब्ध हो।

'ऑरेंज' या 'रेड' हीटवेव अलर्ट के दौरान सभी कठिन शारीरिक और बाहरी गतिविधियों को रोक दिया जाएगा।

स्कूलों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि छात्रों को लगातार स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। बच्चों को हर 20 से 30 मिनट में पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें अपनी पानी की बोतल साथ लाने के लिए भी कहा जाएगा।

दिशा-निर्देशों में हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने, टोपी या छाते का उपयोग करने तथा तरबूज, खरबूजा और खीरे जैसे पानी से भरपूर मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह दी गई है।

यदि किसी छात्र में अत्यधिक पसीना आना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी, भ्रम की स्थिति या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया जाए और ठंडी पट्टियां लगाई जाएं। जरूरत पड़ने पर 108 एंबुलेंस या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया जाए।

इसके अलावा अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा या दिव्यांगता से पीड़ित छात्रों तथा हाल ही में बुखार या दस्त से ठीक हुए बच्चों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी