हनुमान गढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज मामले पर जितेंद्रानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया, बोले- बृजभूषण सिंह को शर्म आनी चाहिए

हनुमान गढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज मामले पर जितेंद्रानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया, बोले- बृजभूषण सिंह को शर्म आनी चाहिए

अयोध्या, 19 जुलाई (आईएएनएस)। अयोध्या के हनुमान गढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने को लेकर बयान पर उठे विवाद मामले पर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया सामने आई है।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि हनुमान गढ़ी में नमाज की गई थी या नहीं की गई थी। इसको लेकर जिस तरह से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दावे किए गए हैं, इतनी बड़ी झूठ शायद ही किसी ने बोला हो। मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए, 20 नवंबर 2003 के काले दिन पर 52 बीघे हनुमान गढ़ी के परिसर में महंत ज्ञान दास के आवासीय परिसर में रोजा इफ्तार की पार्टी और नमाज अदा की गई थी।

जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि बड़ी संख्या में मुसलमानों को बुलाया गया था। षड्यंत्र इतना व्यापक था कि अगर यह सफल हो जाता तो शायद हनुमान जी का दर्शन आने वाले समय में पांचों वक्त नमाज के समय बंद कर दिया जाता। षड्यंत्र के तहत नमाजी हनुमान जी की सीढ़ियों पर बढ़ गए थे, लेकिन हनुमान गढ़ी के ट्रस्ट डीड में धारा 10 के तहत लिखा हुआ था कि वहां किसी भी गैर-धर्म और संप्रदाय का प्रचार नहीं किया जा सकता। इसी धारा 10 को महंत धर्म दास, गौरी शंकर दास, रामबरन दास, और दो अन्य संतों सहित पांच संतों ने तत्कालीन फैजाबाद के जिला कोर्ट में सुनवाई के लिए अर्जी दी थी।

जितेंद्रानंद सरस्वती ने आगे कहा कि तत्कालीन जज अनिल कुमार शुक्ल ने आदेश पारित किया कि तत्कालीन महंत ज्ञान दास कोर्ट में लिखित माफी मांगे और पांचों वादियों के गद्दी पर जाकर फिजिकल माफी मांगे, जिसके बाद ज्ञानदास ने लिखित में माफी मांगी। फिर वर्ष 2005 में प्रयास किया गया, तो मुकदमा दाखिल हो पाया।

उन्होंने हनुमान गढ़ी मंदिर बनवाने को लेकर कहा कि झूठ बोला गया कि नवाब शुजा-उद-दौला ने मंदिर बनवाया। इससे बड़ा पाप और क्या हो जा सकता है? स्कंद पुराण से लेकर बाकी और पुराणों में जिस मंदिर का जिक्र है, वो नवाब शुजा-उद-दौला बनवाएगा। उन्होंने कहा कि महाराजा विक्रमादित्य ने जब श्रीराम जन्मभूमि का मंदिर निर्माण किया था, उसी समय हनुमान गढ़ी पर हनुमान जी के मंदिर का भी निर्माण किया गया था। इसके ऐतिहासिक तथ्य और प्रमाण भी हैं। इन प्रमाणों को झुठला कर जोर-जोर से बोलने से कुछ हासिल नहीं होता।

जितेंद्रानंद सरस्वती ने आगे कहा कि तत्कालीन फैजाबाद और वर्तमान के अयोध्या की जिला कोर्ट के अभिलेख से लेकर विभिन्न चैनलों के वीडियो, ये साबित करते हैं कि 2003 में वहां पर नमाज अदा की गई थी, और वर्ष 2005 में नमाज पढ़वाने की कोशिश की गई थी। 14 दिनों तक हनुमान गढ़ी के नागाओं ने धर्म को बचाने के लिए अनशन और धरना प्रदर्शन किया था। तब गोरखपुर के तत्कालीन सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस धरने को समर्थन देने के लिए हनुमान गढ़ी पधारे थे।

जितेंद्रानंद सरस्वती ने आगे कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है, इसे झुठलाया नहीं जा सकता। अखिल भारतीय संत समिति का कहना है कि संत का चोला ओढ़ कर, पूर्व सांसद बृजभूषण इस तरह से झूठ कैसे बोल लेते हैं? उनको थोड़ी शर्म करनी चाहिए। हनुमान जी और भगवान राम सबका न्याय करेंगे।

--आईएएनएस

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