शिमला, 19 जुलाई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश का दुर्गम पांगी घाटी क्षेत्र राज्य का पहला प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल बन गया है। राज्य सरकार ने रविवार को कहा कि यह पहल सतत विकास, रसायन मुक्त खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार ने इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया है। साथ ही प्राकृतिक तरीके से उगाई गई जौ (बार्ले) के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया गया है, ताकि किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
राज्य सरकार का लक्ष्य लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। इन इलाकों में कम आबादी, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और लंबी सर्दियों के कारण आवागमन और बुनियादी सेवाएं प्रभावित रहती हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, आजीविका और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में विशेष निवेश किया है।
सरकार के अनुसार, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि यहां केवल 3.92 लाख लोग रहते हैं, जो राज्य की कुल आबादी का 5.71 प्रतिशत हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व महज 7 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि राज्य का औसत 123 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।
इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने सभी स्थायी और मौसमी जनजातीय बस्तियों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण और सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करने का दावा किया है। जनजातीय क्षेत्रों में 1,000 पुरुषों पर 1,018 महिलाओं का लिंगानुपात भी राज्य के औसत 972 से बेहतर बताया गया है।
सरकार ने बताया कि जनजातीय उपयोजना (एसटीपी) के तहत हर वर्ष कुल विकास बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा इन क्षेत्रों के लिए निर्धारित किया जाता है। वर्ष 2024-25 में इस मद में 890.28 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए अनुसूचित जनजाति घटक के तहत 638.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 के दौरान 3,361 जनजातीय छात्रों को प्री-मैट्रिक, 5,693 छात्रों को पोस्ट-मैट्रिक और 304 छात्रों को मेधावी छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 568 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 5,084 अनुसूचित जनजाति लाभार्थियों को पोषण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार ने लाहौल-स्पीति और भरमौर में आधुनिक सुविधाओं से लैस आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर, एमआरआई, सीटी स्कैन, प्रयोगशाला और पर्याप्त नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की गई है।
महिला सशक्तिकरण के तहत जनजातीय क्षेत्रों की 3,234 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों और आजीविका कार्यक्रमों के जरिए 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। वहीं, इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
राज्य सरकार ने पहली बार हिमाचल प्रदेश के 75 वर्षों के इतिहास में काजा में हिमाचल दिवस मनाने का निर्णय लिया है, जिसे जनजातीय क्षेत्रों तक सुशासन पहुंचाने और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
इसके अलावा सरकार जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर आजीविका के नए अवसर भी विकसित कर रही है। होमस्टे स्थापित करने, विस्तार करने और उन्नयन के लिए 5 करोड़ रुपये तक के निवेश पर 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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