भोपाल, 10 सितंबर (आईएएनएस)। राज्य भर के नर्सिंग कॉलेजों में अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने योग्य नर्सिंग छात्रों के परीक्षा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
इस मकसद से हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन विभाग संभालने वाले डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने गुरुवार को राज्य सचिवालय में सीनियर अधिकारियों के साथ मामले की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को तय समय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया ताकि तय एकेडमिक जरूरतें पूरी करने वाले छात्रों को नतीजे मिलने में और देरी न हो।
अधिकारियों के साथ बैठक के बाद डिप्टी सीएम शुक्ला ने कहा, "छात्रों का हित सबसे जरूरी है। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक सभी जरूरी प्रक्रियाएं तय समय में पूरी की जानी चाहिए ताकि योग्य छात्रों को नतीजे पाने में कोई दिक्कत न हो।"
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत संबंधित सही संस्थानों को सूचित करें और नतीजे जारी करने के लिए मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के साथ तालमेल पक्का करें।
उन्होंने छात्रों के एकेडमिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह भी कहा कि प्रक्रिया में कोई गैर-जरूरी देरी न हो।
राज्य सरकार का यह कदम उन नर्सिंग कॉलेजों से जुड़ी लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद उठाया गया है जो तय नियमों को पूरा करने में कमज़ोर पाए गए थे।
इस मामले में नर्सिंग संस्थानों में इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और दूसरी जरूरतों से जुड़े आरोप शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने हाल ही में सही और गलत कैटेगरी में रखे गए कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों के बारे में कई निर्देश जारी किए हैं, जिनमें उन्हें नियमों का पालन करने वाले संस्थानों में ट्रांसफर करना, परीक्षाएं और नतीजे घोषित करना शामिल है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जिन छात्रों को सही कॉलेजों में शिफ्ट किया गया है और जिन्होंने जरूरी एकेडमिक और प्रैक्टिकल शर्तें पूरी कर ली हैं, उन्हें अपने संस्थानों की कमियों या गड़बड़ियों की वजह से नुकसान नहीं होना चाहिए।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे पक्का करें कि टीचिंग या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में कोई कमी हो तो उसे सही इंतजामों से पूरा किया जाए ताकि छात्र तय एकेडमिक जरूरतें पूरी कर सकें।
डिप्टी सीएम शुक्ला ने विभाग को यह भी निर्देश दिया कि नियमों के तहत जहां भी ज़रूरी हो, गलत पाए गए कॉलेजों के छात्रों को सही संस्थानों से जोड़ने या अटैच करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा, "कोर्ट के आदेश, विभागीय नियमों और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर ज़रूरी कार्रवाई की जानी चाहिए।"
बैठक में पब्लिक हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर धनराजू एस, मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार उपेंद्र धोते और विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हुए।
मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए।
--आईएएनएस
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