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'सचेत' ऐप बना डिजिटल सुरक्षा कवच, चक्रवात-बाढ़ के रियल-टाइम अलर्ट से गुजरात के किसानों-मछुआरों को मिली बड़ी राहत

सचेत

गांधीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। सरकार और राज्य प्रशासन के लिए किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा के दौरान जान-माल के नुकसान को कम से कम करना सबसे जरूरी है।

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) द्वारा बनाया गया 'सचेत' ऐप और 'सचेत नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल' संकट और आपदा के समय लोगों की जान बचाने में बहुत मददगार साबित हुए हैं।

गुजरात में इस्तेमाल किया जा रहा 'सचेत' ऐप राज्य के तटीय इलाकों में किसानों और मछुआरों को जरूरी जानकारी दे रहा है, जिससे उन्हें संभावित खतरों और नुकसान से बचाया जा सकता है।

'सचेत' ऐप, चक्रवात, भारी बारिश, बिजली गिरने, बाढ़ और लू (हीटवेव) जैसी आपदाओं के बारे में रियल-टाइम अलर्ट और अपडेट भेजने के लिए कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) और जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करता है। इससे मछुआरों और किसानों को सुरक्षित जगहों पर जाने और संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।

कुछ किसानों ने अपना अनुभव साझा किया कि कैसे 'सचेत' ऐप ने पहले से जानकारी पाने और उसके अनुसार कदम उठाने में बहुत बड़ा बदलाव लाया है।

वलसाड के किसान अंबुभाई पटेल ने बताया कि 'सचेत' ऐप किसानों को मौसम की जानकारी देता है। यह उन्हें आने वाले तूफान और बारिश के बारे में बताता है, जिससे वे समय रहते अपने खेतों से घर लौट सकते हैं।

उन्होंने कहा, "अगर किसी किसान की फसल कटाई के लिए तैयार है, तो वे उसे सुरक्षित जगह पर ले जा सकते हैं। 'सचेत' ऐप जनता को जरूरी जानकारी देता है।"

एक और मछुआरे, भागूभाई टंडेल ने कहा कि यह ऐप मछली पकड़ने वाले समुदाय के लिए बहुत अच्छा है और इससे काफी फायदे होते हैं। जब भी बारिश की संभावना होती है, तो यह समय पर जानकारी देता है।

खास बात यह है कि टीवी और रेडियो जैसे पारंपरिक संचार माध्यमों में आपदा अलर्ट फैलाने और उन पर प्रतिक्रिया देने में काफी समय लगता है, लेकिन 'सचेत' ऐप ने इस प्रक्रिया को आसान और तेज बना दिया है।

'सचेत' ऐप और पोर्टल के जरिए राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और गांव के स्तर तक अलर्ट भेजे जाते हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य बेहतर ढंग से हो पाते हैं।

अहमदाबाद मौसम विभाग के निदेशक अशोक कुमार दास ने बताया कि इस ऐप के जरिए मौसम की जानकारी दी जाती है। साथ ही, मौसम से जुड़े अपडेट भी दिए जाते हैं, ताकि लोगों को मौसम की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी मिल सके।

राहत निदेशक एस.सी. सावलिया ने बताया कि इस साल मॉनसून के दौरान अहमदाबाद में अलग-अलग चेतावनी प्रणालियों के जरिए लगभग 70 करोड़ संदेश भेजे गए। एनडीएमए की ओर से तैयार किया गया यह ऐप मौसम की मार झेलने वाले हजारों लोगों के लिए 'डिजिटल सुरक्षा कवच' का काम कर रहा है।

--आईएएनएस

एससीएच